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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 14, 2022 10:44 AM IST
डिप्रेशन के शिकार लोगों के लिए चमत्कार का काम कर सकता है ये विटामिन, स्टडी में दावा लक्षण होने लगेंगे कम
दुनियाभर के कई देशों के शोधकर्ताओं की एक टीम ने मिलकर एक अध्ययन किया है, जिसमें विटामिन डी सप्लीमेंट से डिप्रेशन से पीड़ित लोगों में अवसाद के लक्षणों के कम होने का पता लगाया गया है। दुनियाभर में लगातार डिप्रेशन के लक्षण वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। शोध के मुताबिक, मौजूदा वक्त में ली जाने वाली एंटी-डिप्रेसेंट की दक्षता अक्सर अपर्याप्त मानी जाती है, जिसकी वजह से अवसाद के लक्षणों को बढ़ने की समस्या हो रही है।
ये मेटा-एनालिसिस दुनियाभर के 41 अध्ययनों से प्राप्त निष्कर्षों से निकल कर सामने आया है। बताया जा रहा है कि ये अब तक का सबसे बड़ा विश्लेषण है, जिसमें विटामिन डी सप्लीमेंट के साथ डिप्रेशन के संबंध का पता लगाने की कोशिश की गई है। ये अध्ययन लोगों में विटामिन डी की दक्षता से अवसाद के लक्षणों के कम होने का पता लगाने के लिए किया गया था। इस अध्ययन के लिए अलग-अलग लोगों में प्लेसेबो कंट्रोल ट्रायल किए गए थे।
इस अध्ययन में आम आबादी में डिप्रेशन के मरीजों से प्राप्त निष्कर्षों को शामिल किया गया है। ये लोग अलग-अलग शारीरिक स्थितियों से भी परेशान थे। इस एनालिसिस के निष्कर्षों से ये पता चला है कि डिप्रेशन से पीड़ित लोगों में विटामिन डी सप्लीमेंट, प्लेसेबो की तुलना में अवसाद के लक्षणों को हल्का करने में प्रभावी है।
सबसे ज्यादा अंतर विटामिन डी की डोज में पाया गया लेकिन आमतौर पर विटामिन डीसप्लीमेंट की डोज 50 से 100 माइक्रोग्राम प्रति दिन ली जाती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्टर्न फिनलैंड के इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल मेडिसिन के प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य लेख टयूम्स माइकोला का कहना है कि इस मेटा-एनालिसिस के व्यापक स्तर के बावजूद सबूतों की सटीकता काफी कम है क्योंकि अध्ययन में शामिल लोगों की विविधता सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा एक चीज ये भी है कि बहुत सारे अध्ययन एकतरफा जोखिम से भी जुड़े हुए हैं।
माइकोला ने कहा कि ये निष्कर्ष डिप्रेशन के उपचार में विटामिन डी सप्लीमेंट की संभावित भूमिका पर अधिक प्रकाश डालने के मकसद से डिप्रेशन के मरीजों पर उच्च स्तर के नए क्लीनिकल ट्रायल करने के लिए प्रोत्याहित करता है।