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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : December 14, 2018 10:02 AM IST
The DTaP-IPV vaccine is given as one dose to children at 4 to 6 years of age. ©Shutterstock.
रुबेला वायरस के टीकाकरण से कुछ बच्चों में साइड-इफेक्ट्स देखने को मिलते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कुछ बच्चों में चक्कर आने, सर में दर्द, पेट दर्द, बेचैनी, मिचली और घबराहट की समस्या देखी जाती है। रूबेला और मिजल्स से बचने के लिए किये जाने वाले टीकाकरण में ऐसा क्यों होता है ? यह सवाल हर किसी के मन में होता है। ये भी पढ़ेंः रूबेला वायरस के बारे में कितना जानते हैं आप ? जानें खतरा और लक्षण।
एक्सपर्ट्स की माने तो ऐसा ज्यादातर मामलों में बच्चों में डर के कारण होता है। कुछ मामलों में बच्चे खाली पेट होते है उसकी वजह से भी बच्चों में परेशानी देखी जाती है।
कुछ बच्चों में पहले से हुए वायरल इंफेक्शन की वजह से भी टीकाकरण के बाद कुछ परेशानियां देखी जा सकती हैं। एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि वैक्सीन से ही इस तरह के साइड-इफेक्ट्स होते हैं यह नहीं कह सकते क्योंकि वैक्सीन WHO से प्री-क्वालिफाइड और इसका इस्तेमाल पूरी दुनिया में हो रहा है।
क्या है एमआर वैक्सीन ? एमआर वैक्सीन दो तरह की बीमारियों से बचाव करने के लिए है। पहली बीमारी है मीजल्स जिसे आम भाषा में खसरा कहते हैं। दूसरी बीमारी है रूबेला इन दोनों बीमारियों में रूबेला ज्यादा खतरनाक होती है। रूबेला का ज्यादा असर प्रेगनेंट महिलाओं पर होता है जिसकी वजह से होने वाले बच्चों पर असर होता है। इसकी वजह से बच्चे अंधे हो सकते हैं, मेंटली रिटार्डेड हो सकते हैं। इन सब परेशानियों से बचने के लिए ही एमआर वैक्सीन लगायी जाती है। ये भी पढ़ेंः रूबेला क्यों है खतरनाक, क्यों जरूरी है टीका लगवाना ?
बच्चों में क्यों हो रही परेशानी ? ज्यादातर मामलों में देखा जाता है कि बच्चे इंजेक्शन लगवाना नहीं चाहते हैं जिसकी वजह से बच्चों में डर की वजह से या दर्द से वेजोवेगल अटैक पड़ता है। इसकी वजह से बच्चे कुछ पल के लिए होश खो सकते हैं लेकिन ये खुद ब खुद ठीक भी हो जाते हैं। इस तरह के अटैक में वैक्सीन की कोई भूमिका नहीं होती है। ये एक तरह से डर की वजह से होता है।