
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Raising awareness about the factors contributing to infertility and the available treatment options is crucial. Promoting healthier lifestyles can mitigate the risk of infertility. Encouraging a family-friendly workplace can reduce the pressure to delay parenthood.
Phone usage and infertility: एक नयी स्टडी में यह कहा गया है कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से पुरुषों में नपुंसकता का खतरा बढ़ सकता है। पुरुषों में इंफर्टिलिटी का खतरा बढ़ाने के लिए उनका फोन जिम्मेदार हो सकता है, यह दावा किया गया फर्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में। इस स्टडी के अनुसार, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन उत्सर्जित करने वाले मोबाइल फोन का बहुत अधिक इस्तेमाल करने से पुरुषों में स्पर्म की संख्या कम हो जाती है और शुक्राणुओं की कमी पुरुषों में पिता बनने की क्षमता कम हो सकती हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, बीते 50 साल में पुरूषों की स्पर्म क्वालिटी में बहुत गिरावट देखी गयी है। इसके कई कारण हैं जो पर्यावरण और लोगों की जीवनशैली से जुड़े हुए हैं। हालांकि, अभी तक मोबाइल फोन के असर के बारे में विचार नहीं किया गया था। स्विट्जरलैंड में जिनेवा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने लगभग 13 वर्षों (2005 और 2018) के दौरान इलाज के लिए आए 18 से 22 वर्ष आयु वर्ग के 2,886 स्विस पुरुषों के डेटा का विश्लेषण किया। इस डेटा पर आधारित एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी में मोबाइल फोन के ज्यादा उपयोग और लो स्पर्म काउंट और कमजोर स्पर्म मोबिलिटी जैसी प्रॉब्लम्स के बीच पता चला।
स्टडी में देखा गया कि जो पुरुष मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करते थे उनके स्पर्म की क्वालिटी उन पुरुषों से बेहतर थी जो फोन का इस्तेमाल बहुत अधिक करते थे। स्पर्म की क्वालिटी उसकी एकाग्रता, शुक्राणु की संख्या, शुक्राणुओं की गतिशीलता और उनकी बनावट जैसे मापदंडों के मूल्यांकन के आधार पर तय होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा स्थापित मूल्यों के आधार पर यह कहा जाता है कि अगर किसी पुरुष के शुक्राणु की सांद्रता 15 मिलियन/ प्रति मिलीलीटर से कम होती है, तो गर्भधारण में अधिक समय लग सकता है। वहीं, शुक्राणु सांद्रता 40 मिलियन/ प्रति मिलीलीटर से कम है तो यह नपुंसकता का भी कारण बन सकता है।
बता दें कि इससे पहले की कुछ अन्य स्टडीज में भी यह पता कि पिछले 5 दशकों में पुरुषों में स्पर्ट क्वालिटी में तेजी से गिरावट आयी है।