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कॉफी आजकल जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है, कई लोगों की सुबह के समय कॉफी के बिना आंख ही नहीं खुलती है तो कुछ लोग कॉफी के बिना ऑफिस में काम नहीं कर पाते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो हर किसी को चुस्त रहने और आलस दूर भगाने के लिए कॉफी की जरूरत पड़ती है। लेकिन अब कॉफी का इस्तेमाल सिर्फ चुस्त रखने के लिए नहीं बल्कि दिमागी बीमारियों का इलाज करने में भी मदद करेगा। कॉफी बनाने के बाद उसका जो बचा हुआ हिस्सा (Coffee Waste) होता है, इलेक्ट्रोड कोटिंग के रूप में किया जा सकता है। इलेक्ट्रोड खास प्रकार के पैच होते हैं, जो एक मशीन से जुड़े होते हैं। ये पैच मस्तिष्क के अंदर चल रही विद्युत गतिविधियों को संकेतों के रूप में कंप्यूटर तक पहुंचाने का काम करते हैं। कंप्यूटर इन्हें डिकोड करके स्क्रीन पर दिखाता है, जिससे मेडिकल प्रोफेशनल मरीज की समस्याओं का पता लगाते हैं। हालांकि, एक नई स्टडी में पाया गया है कॉफी बनाने के बाद बचे हुए प्रोडक्ट का इस्तेमाल इलेक्ट्रोड में कोटिंग के रूप में किया जा सकता है। चलिए जानते हैं किस प्रकार कॉफी मस्तिष्क की बीमारियों का पता लगाने में मदद कर सकती है।
हाल ही में अमेरिका में कई गई एक स्टडी में पाया गया कि कॉफी के बच्चे हिस्सों को दिमाग की गतिविधियों को मापने वाले यंत्र में एक कोटिंग के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसपर रिसर्चर्स ने पाया कि इलेक्ट्रोड कोटिंग के लिए कॉफी ग्राउंड्स का इस्तेमाल करना सिर्फ एनवायरमेंट फ्रेंडली ही नहीं है बल्कि यह काफी प्रभावी रूप से काम भी करता है।
ओहियो में स्थित सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि कॉफी ग्राउंड का इस्तेमाल करने से डोपामाइन की रिलीज का पता लगाने में तीन गुना ज्यादा प्रभावी है। रिसर्च के बाद साइंटिस्ट ने माना कि कॉफी के वेस्ट प्रोडक्ट की इलेक्ट्रोड कोटिंग पारंपरिक रूप से इस्तेमाल की जा रही कार्बन फाइबर इलेक्ट्रोड की तुलना में ज्यादा प्रभावी है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि इस्तेमाल की गई कॉफी के वेस्ट पार्ट का इस्तेमाल उर्जा को संरक्षित करने के लिए पोरस कार्बन सुपरकैपेसिटर बनाने के लिए किया जाता था, जो एक प्रकार की ऑर्गेनिक बैटरी होती थी। लेकिन अब पीएचडी शोधकर्ता और इस रिसर्च के प्रमुख रिसर्चर एश्ले रॉस ने कहा कि कॉफी वेस्ट का अलग तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रमुख शोधकर्ता एश्ले रॉस ने कहा कि मैने पेपर में देखा कि कॉफी ग्राउंड्स का इस्तेमाल एनर्जी को स्टोर करने के लिए पोरस कार्बन बनाने के लिए किया जा रहा है, तो मैने सोचा कि हम कंडक्टिव मटेरियल को हमारी न्यूरोकेमिस्ट्री की रिसर्च में इस्तेमाल कर सकते हैं।
हालांकि, वेबसाइट्स पर मिली खबरों के अनुसार इलेक्ट्रोड कोटिंग के लिए कॉफी ग्राउंड का सही इस्तेमाल, उसकी प्रभावशीलता और उससे जुड़े साइड-इफेक्ट्स का पता लगाने के लिए अभी भी इस पर परीक्षण किए जा रहे हैं।