बचना है डायबिटिक फुट से तो पहनें ये नई तकनीक वाले जूते

डायबिटीक फुट की वजह से मरीजों के पैर में छाले या फोड़े हो जाते हैं जिसकी वजह से घाव बनने लगता है और यह समस्या कभी-कभी गंभीर हो जाती है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : November 19, 2018 1:27 PM IST

डायबिटिक फुट की समस्या डायबिटीज के मरीजों को होने वाली एक आम परेशानी हैं। डायबिटीज के मरीजों में हाल के दिनों में इसकी समस्या बहुत तेजी से बढ़ी है। डायबिटीक फुट की वजह से मरीजों के पैर में छाले या फोड़े हो जाते हैं जिसकी वजह से घाव बनने लगता है और यह समस्या कभी-कभी गंभीर हो जाती है और मरीजों के पैरों को काटने की स्थिति भी बन जाती है।

हाल ही में इसके बचाव के लिए कई तरह के जूतों को भी इजाद किया गया है। डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहतर जूतों के प्रयोग से इसका घतरा कम होता है।

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क्या है डायबिटिक फुट

कई बार यदि डायबिटीज के मरीज लंबे समय तक खड़े रहते हैं तो उनके पैरों की नसें अवरुद्ध हो जाती हैं, जिसे एथेरोस्केरोेसिस भी कहते हैं। इसके कारण ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी होती है, जिससे एनहायड्रोसिस यानी त्वचा सूखने लगती है, जिससे उसमें दरार पड़ती हैं और बैक्टीरिया होने लगते हैं। इन सबके कारण पैरों में जख्म होने लगते हैं। ध्यान न देने पर इसमें छाला या फोड़ा या फिर संक्रमण हो जाता है, इसे ही डायबिटीक फुट भी कहा जाता है।

क्यों होता है

डायबिटीज के सभी रोगियों को हमेशा ही ब्लड शुगर पर नियंत्रण रखना ही होता है। इसके अलावा गलत तरह के जूते पहने गए हो, शराब का सेवन करते हो, सिगरेट पीते हो, तो भी यह होता है। डायबिटीज के वे मरीज जिन्हें रेटिनोपेथी, दिल की तकलीफ या नेप्रोपैथी की शिकायत है, उन्हें इसका खतरा अधिक होता है। मोटापा जिन्हें है उन्हें भी इसका खतरा है।

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उपचार क्या है

इसमें सबसे बड़ा उपचार पैरों पर ज्यादा वजन नहीं पड़ने देना है। पैदल चलने से जो दबाव पड़ेगा, उसके कारण संक्रमण बढ़ सकता है और फोड़ा या पैरों में चीरा और अधिक हो सकता है। डायबिटिक शूज पहने जा सकते हैं।

डायबिटिक फुट में छाले या फोड़े को डॉक्टर खत्म कर सकते हैं, लेकिन तत्काल उपचार पर ही यह संभव है। अल्सर के आसपास के टिश्यूज को लैब में भेजकर यह पता कर सकते हैं कि कौन-सा एंटीबायोटिक इसे ठीक करेगा। यदि एक्सरे में पता चलता है कि संक्रमण हड्‌डी तक है तो फिर अलग उपचार होगा। यदि डायबिटीज के रोगी को पैर में जरा भी कोई आशंका लगे तो तत्काल उपचार करना चाहिए।

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