अब सस्ते में हो सकेगी कोरोना की जांच, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक

इस अध्ययन में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी (University of Washington) के शोधकर्ता भी शामिल हुए हैं। शोधर्कताओं ने अपने अध्ययन में 215 कोविड-19 सैंपल को शामिल करके इनका परीक्षण किया है। इस परीक्षण में पता चला कि जिस परीक्षण से वर्तमान में कोरोनावायरस की टेस्टिंग की जा रही है, उसमें से जिन लोगों को कोरोना पॉजिटिव बताया गया है, उसमें से 30 लोग नई प्रणाली की टेस्टिंग से कोरोना नेगेटिव आए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नई प्रणाली की टेस्टिंग से 92 फीसदी तक सटीक रिपोर्ट देने का दावा (Cheapest COVID-19 Test ) करती है।

WrittenBy

Written By: Kishori Mishra | Updated : October 8, 2020 11:22 AM IST

Cheapest COVID-19 Test : कोरोनावायरस की वैक्सीन को लेकर अभी अध्ययन और रिसर्च का सिलसिला जारी है। अभी पूरी दुनिया के लोग वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं, अब अमेरिका के वैज्ञानिकों द्वारा एक कोरोना की जांच के लिए एक नई प्रणाली विकसित की गई है। रिसर्चर्स के अनुसार, यह जांच प्रणाली बहुत ही सस्ती और प्रभावी है, जो विकासशील देशों के लिए सही है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस नई टेस्टिंग में किसी तरह के अभिकर्मों का इस्तेमाल नहीं किया (Cheapest COVID-19 Test ) जाता है।

इस अध्ययन में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी (University of Washington) के शोधकर्ता भी शामिल हुए हैं। शोधर्कताओं ने अपने अध्ययन में 215 कोविड-19 सैंपल को शामिल करके इनका परीक्षण किया है। इस परीक्षण में पता चला कि जिस परीक्षण से वर्तमान में कोरोनावायरस की टेस्टिंग की जा रही है, उसमें से जिन लोगों को कोरोना पॉजिटिव बताया गया है, उसमें से 30 लोग नई प्रणाली की टेस्टिंग से कोरोना नेगेटिव आए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नई प्रणाली की टेस्टिंग से 92 फीसदी तक सटीक रिपोर्ट देने का दावा (Cheapest COVID-19 Test ) करती है।

176 किलो की महिला ने कोरोना को दी मात, डायबिटीज, कैंसर जैसी कई बीमारियों से है ग्रसित

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ वर्मोंट (University of Vermont) के वरिष्ठ लेखक जेसन बॉटन का कहना है कि आरटी-पीसीआर टेस्टिंग प्रणाली में तीन चरणों से पता चलता है। वहीं, इस नई प्रणाली से सिर्फ 2 चरणों में आप कोरोना की टेस्टिंग कर सकते हैं।

जेसन बॉटन ने इस नई टेस्टिंग प्रणाली के दोरोना चरणों को काफी विस्तार से समझाया है। बॉटन ने कहा कि आरटी-पीसीआर टेस्टिंग प्रणाली के पहले चरण में स्वैब (Swab) के जरिए नाक से सैंपल को लेकर दूसरे चरण में सैंपल को शीशी में डालकर जांच की जाती है। वहीं, नई प्रणाली में पहले से सीधे तीसरे चरण में जाकर केमिकल्स के जरिए टेस्ट की जाती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, विकासशील देशों के हिसाब से नई प्रणाली काफी सुविधाजनक है। उनके मुताबिक ये बहुत ही सस्ती और कम बचत की टेस्टिंग है।

सीसीडी ने किया सावधान, हवा से इस तरह फैल रहा है कोरोनावायरस