खुशखबरी: अब जल्द ही चश्मे से मिलेगा छुटकारा, US ने चश्मे से निजात दिलाने वाली पहली आई ड्रॉप को किया अप्रूव

यूएस एफडीए ने हाल ही में ऐसी पहली आई ड्रॉप को अप्रूवल दिया है जिससे उम्र से जुड़े नजर की समस्याओं को ठीक करने में मदद मिल सकती है।

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Written By: Atul Modi | Published : July 16, 2022 10:21 AM IST

बचपन में अपने अपने दादा-दादी को उनके चश्मों को साथ रखते हुए जरूर देखा होगा। खासकर अखबार या कोई किताब पढ़ने के लिए वह चश्मों का प्रयोग करते थे। उम्र बढ़ने के साथ-साथ आंखों की एलास्टिसिटी प्रभावित होती है और साफ देखने में बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति को प्रेसब्योपिया (Presbyopia) कहा जाता है। यह आंखों से जुड़ी एक स्थिति होती है जिसे 40 के बाद ही देखा जाता है। आपको नजदीक की चीजें पढ़ पाने में दिक्कत होगी और इसके लिए चश्मों की जरूरत पड़ेगी। यह स्थिति काफी आम है और अधिकतर लोग इससे जूझ रहे हैं।

क्या आई ड्रॉप रीडिंग ग्लासेस की जगह ले सकती है?

यूएस एफडीए ने हाल ही में ऐसी पहली आई ड्रॉप को अप्रूवल दिया है जिससे उम्र से जुड़े नजर की समस्याओं को ठीक करने में मदद मिल सकती है। इसका प्रयोग करने के बाद आपको चश्मों की जरूरत भी नहीं पड़ने वाली है। 40 से 50 की उम्र वाले लोग जो रोजाना के काम भी बिना चश्मे के नहीं कर सकते हैं, के लिए यह आई ड्रॉप बहुत फायदेमंद है। फोन या कंप्यूटर का प्रयोग करना इस ड्रॉप से काफी आसान हो जाने वाला है।

दोनों आंखों में एक एक ड्रॉप रोजाना डाल लें। यह ड्रॉप अप्लाई करने के 15 मिनट बाद असर दिखाना शुरू करती है और इसका असर 6 घंटे तक रहता है। पिलो कार्पेन नाम के ड्रग की फॉर्मेशन व्यूटी कहलाती है। रिसर्चर्स ने टियर फिल्म का pH एडजस्ट करने के लिए इसी तकनीक का प्रयोग किया है। इस तकनीक से पुपिल के साइज को कम किया जा सकता है। इससे दूर की चीजों को देख पाने में मदद मिलती है।

इन ड्रॉप का प्रभाव एक महीने तक प्रयोग करने के बाद और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

आई ड्रॉप के क्लिनिकल ट्रायल

इसके लिए दो क्लिनिकल ट्रायल किए गए जिसमें प्रेसबिओपिया के 750 मरीजों को शामिल किया गया और इन सबकी उम्र 40 से 55 के बीच थी। आधे से ज्यादा मरीजों को नई आई ड्रॉप मिली जबकि कुछ मरीजों को प्लेसिबो आई ड्रॉप मिली।

भागीदारों ने एक आंख में व्यूटी या फिर प्लेसिबो को डाला वह भी दिन में एक बार। इस दवाई का 15 मिनट में ही असर दिखना शुरू हो गया। इसका प्रयोग करने के बाद एक शार्प विजन मिला जिसका असर 6 घंटों तक रहा।

क्लिनिकल स्टडीज में रिसर्च करने वालों को कोई साइड इफेक्ट भी नहीं देखने को मिला। सबसे ज्यादा साइड इफेक्ट सिर दर्द और आंखों का लाल होना था। आई ड्रॉप के प्रयोग करने से फोकस में भी लोगों को बदलाव देखने को मिला।

इसे कौन-कौन प्रयोग कर सकता है?

जिस व्यक्ति को माइल्ड से गम्भीर प्रेसब्योपिया है उसे इस दवा को दे सकते है। इस दवाई का प्रयोग 65 की उम्र के बाद वाले लोग नहीं कर सकते हैं क्योंकि उनकी उम्र फिर ज्यादा बढ़ने लगती है। 30 दिन तक अगर इस दवा का प्रयोग करते हैं तो लग्भग 6 हजार रुपए का खर्च आ सकता है।

रात को ड्राइविंग करते समय या फिर कम लाइट में काम करते समय इस दवाई का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके डोज के बारे में जरूर पता कर लें क्योंकि ज्यादा मात्रा में इसका प्रयोग करने से रेटिनल डिटैचमेंट की समस्या देखने को मिल सकती है।

वैसे तो इस दवाई को पूरा उपचार नहीं कह सकते हैं लेकिन यह आंखों से जुड़ी समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है। हालांकि म्योपिया और हाइपरोपिया जैसी स्थिति से जूझने वाले लोगों को यह दवाई कोई मदद नहीं कर पाएगी इसलिए इसका प्रयोग न करें।

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