जानें, एमरजेंसी में मरीजों को लिखी जाने वाली फ्लूरोक्विनोलोन क्यों नहीं है जरूरी

अध्ययन के मुताबिक, फ्लुरोक्विनोलोन आमतौर पर उस स्थिति में दी जाती है जब एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है।

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Written By: Editorial Team | Published : July 24, 2018 7:24 AM IST

चिकित्सालयों और आपातकालीन विभागों में वयस्क रोगियों के लिए लिखी जाने वाली फ्लूरोक्विनोलोन लगभग पांच प्रतिशत पूरी तरह से अनावश्यक है।

फ्लूरोक्विनोलोन के करीब 20 प्रतिशत पर्चो में फस्र्ट-लाइन थेरेपी के रूप में उनके उपयोग की सिफारिशों का पालन नहीं किया जाता है। एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, फ्लुरोक्विनोलोन आमतौर पर उस स्थिति में दी जाती है जब एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है। एफडीए की चेतावनी के आधार पर फ्लूरोक्विनोलोन का उपयोग तीव्र बैक्टीरियल साइनुसिटिस और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस या अन्य उपचार विकल्पों की अनुपस्थिति में यूरिनरी ट्रेक्ट संक्रमण के रोगियों में ही किया जाना चाहिए।

हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल ने कहा, फ्लूरोक्विनोलोन के 60 से अधिक जेनेरिक वर्जन होते हैं। बाजार में सिस्टेमिक उपयोग के लिए पांच फ्लूरोक्विनोलोन मोक्सीफ्लोक्सेसिन, सिप्रोफ्लोक्सेसिन, जेमीफ्लोक्सेसिन, लेवोफ्लोक्सेसिन एवं ऑफलोक्सेसिन उपलब्ध हैं। यह एंटी-टीबी दवाएं भी हैं और अगर इनका दुरुपयोग किया जाता है तो दवा प्रतिरोधी टीबी का कारण बन सकती है।

उन्होंने कहा, फ्लूरोक्विनोलोन उन लोगों के लिए आरक्षित होनी चाहिए, जिनके पास वैकल्पिक उपचार के विकल्प नहीं हैं। जब उन स्थितियों के लिए निर्धारित किया जाता है जिनके लिए एंटीबायोटिक उपचार की आवश्यकता नहीं होती है, तो यह विभिन्न दुष्प्रभावों का कारण बन सकती हैं, जिनमें ध्यान लगाने में परेशानी, उलझन, घबराहट, स्मृति हानि और भ्रम की स्थिति शामिल है।

2016 में एफडीए ने संभावित रूप से स्थायी सिंड्रोम के अस्तित्व को स्वीकार किया था, जिसे फ्लूरोक्विनोलोन से जुड़ी अक्षमता (एफक्यूएडी) कहा जाता है और सिफारिश की जाती है कि दवाएं गंभीर संक्रमण के लिए आरक्षित हों। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता अक्सर किसी एंटीबायोटिक निर्धारित करने के पीछे रोगी संतुष्टि का हवाला देते हैं।

डॉ. अग्रवाल ने कहा, कई जीवाणुओं ने तथाकथित आश्चर्यजनक दवाओं के प्रतिरोध को कम किया है, जिससे उनकी प्रभावशीलता कम हो गई है। एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिरोध उनके विकास के बाद हुआ क्योंकि उन्हें पहली बार खोजा गया था।

डॉ. अग्रवाल ने कुछ सुझाव देते हुए कहा, एंटीबायोटिक दवाओं का तर्कसंगत उपयोग करें। जब आवश्यक हो तब और दिशानिर्देशों के अनुसार ही उपयोग करें। उचित निदान के बिना व्यापक स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स से बचें। टीकाकरण के उपयोग से संक्रमण को रोकें और हाथों की स्वच्छता व संक्रमण नियंत्रण तकनीकों और स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग्स के साथ-साथ समुदाय में स्वच्छता सहित बुनियादी स्वच्छता में सुधार करें।

उन्होंने कहा, किसानों और खाद्य उद्योग को एंटीबायोटिक्स प्रतिरोध का प्रसार रोकने के लिए स्वस्थ जानवरों में बीमारी रोकने के लिए नियमित रूप से एंटीबायोटिक्स का उपयोग करना बंद कर देना चाहिए।

स्रोत: IANS Hindi.

चित्रस्रोत: shutterstock.

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