एंटरोकोकस बैक्टीरिया से लड़ रही है उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता, जानें क्‍या है यह

आस्‍ट्रेलियाई अध्ययन के मुताबिक हाथ धोने के लिक्विड और सेनिटायजर्स से एक विशेष प्रकार के बैक्टीरिया में वृद्धि हुई है। जो आंत में पाया जाता है। इसे एंटरोकोकस फेशियम कहा जाता है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : August 8, 2019 4:14 PM IST

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता कई तरह के गंभीर रक्त संक्रमणों से जूझ रही है। उसे एंटरोकोकस  बैक्‍टीरिया (Enterococcus bacteria) ने घेर लिया है। जो अमूमन अस्‍पतालाेें में पाया जाता है। इसके चलते उसे दी जा रही सात एंटीबायोटिक दवाओं में से छह अपना प्रभाव नहीं दिखा पा रही हैं। लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) से दिल्ली के अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एम्स) में स्थानांतरित किए जाने के बाद एक रिपोर्ट आई है।

एंटरोकोकस बैक्टीरिया से है पीड़ित (Enterococcus bacteria)

पीड़िता की ब्लड कल्चर एग्जामिनेशन रिपोर्ट में कहा गया है कि वह कई रक्त संक्रमणों से ग्रसित है। 28 जुलाई को ट्रक-कार दुर्घटना के बाद से पीड़िता और उसके वकील जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इस हादसे में पीड़िता के दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी। लखनऊ के संदीप तिवारी के अनुसार, दुष्कर्म पीड़िता की ब्लड कल्चर रिपोर्ट से पता चलता है कि वह एंटरोकोकस बैक्टीरिया से पीड़ित है।

क्‍या है एंटरोकोकस बैक्टीरिया (Enterococcus bacteria)

एंटरोकोकस एक प्रकार के बैक्टीरिया हैं, जो मनुष्यों के गैस्ट्रोइन्टेस्टनल ट्रैक्ट में रहते हैं। इन जीवाणुओं की कम से कम 18 अलग-अलग प्रजातियां हैं। एंटरोकोकस फेसेलिस (ई. फेसेलिस) सबसे आम प्रजातियों में से एक है। यह बैक्टीरिया आम तौर पर मुंह और योनि में भी रहते हैं। यह बहुत लचीले होते हैं, इसलिए वे गर्म, नमकीन या अम्लीय वातावरण में जीवित रह सकते हैं।

हेल्‍थ केयर फेसिलिटी से फैल सकता है (Enterococcus bacteria)

आस्‍ट्रेलियाई अध्ययन के मुताबिक हाथ धोने के लिक्विड और सेनिटायजर्स से एक विशेष प्रकार के बैक्टीरिया में वृद्धि हुई है। जो आंत में पाया जाता है। इसे एंटरोकोकस फेशियम कहा जाता है। यह हेल्थकेयर सेटिंग्स में कैथेटर, वेंटिलेटर या सेंट्रल लाइंस के माध्यम से फैल सकता है। हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल की मानें तो अस्पताल से प्राप्त संक्रमण (एचएआई) या नोसोकोमियल संक्रमण ऐसा संक्रमण है, जो आम तौर पर अस्पताल में घुसने के 48 घंटे बाद होता है। यह मूल स्थिति से संबंधित नहीं है और न तो यह प्रवेश के समय मौजूद होता है। यहां तक की यह इनक्यूबेटिंग भी नहीं होता है।

जानलेवा हो सकता है संक्रमण 

डॉक्टरों ने कहा कि यदि यह शरीर के दूसरे स्थानों पर फैल जाएं तो इसके चलते जानलेवा संक्रमण हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पीड़िता को पांच अगस्त को एम्स में एयरलिफ्ट कर के स्थानांतरित किया गया था।

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