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Written By: Atul Modi | Updated : August 26, 2022 5:37 PM IST
देश के सबसे बड़े होम्योपैथिक संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथिक (National Institute of Homeopathic) का निरीक्षण केंद्रीय आयुष मंत्री सर्वानंद सोणोवाल ने किया। दिल्ली के नरेला में निर्मित यह संस्थान देश का सबसे बड़ा होम्योपैथिक संस्थान होने के साथ ही उत्तरी भारत के लिये फायदेमंद साबित होगा। यह संस्थान कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथिक का सेटेलाइट सेंटर के रुप में कार्य करेगा।
एनआईएच का निरीक्षण करते हुए केंद्रीय मंत्री सोणोवाल ने कहा कि एनआईएच स्वास्थ्य सेवाओं को आयुष की मुख्य धारा से जोड़ेगा और पूरे उत्तरी भारत के लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगा। संस्थान के लोकार्पण के बाद केंद्रीय मंत्री ने परिसर का भ्रमण किया और पत्रकारों के सवालों का जबाव दिया। केंद्रीय मंत्री सोणोवाल ने कहा कि, ''राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में आयुष को स्वास्थ्य की मुख्यधारा में शामिल करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही यह भी कोशिश की गई है कि आयुष को स्वास्थ्य सेवा में शामिल शिक्षा और अनुसंधान से भी जोड़ा जाए। इसी के तहत मंत्रालय ने होम्योपैथी के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान के विकास के लिए शीर्ष संस्थाओं को विकसित करने, नवाचार और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।''
इस अवसर पर आयुष राज्य मंत्री डॉ. मुंजपरा महेंद्रभाई कालुभाई ने इसे आयुष की प्रगति के लिए इसे बेहद महत्वपूर्ण संस्थान बताया। इस मौके पर स्थानीय सांसद हंसराज हंस, आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, आयुष मंत्रालय एवं एनआइएच के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
Visited and inspected progress of work at the National Institute of Homoeopathy (NIH) at Narela, Delhi along with colleague Shri @DrMunjparaBJP ji & MP Shri @hansrajhansHRH ji. @moayushpic.twitter.com/Goi3OBMpcB
— Sarbananda Sonowal (@sarbanandsonwal) August 26, 2022
नेशनल इंस्टीेटयूट ऑफ होम्योपैथी के निर्माण का कार्य मार्च 2018 में शुरु हुआ। जो कि करीब 300 करोड़ रुपए में तैयार हुआ है। कुल दस एकड़ में इसका निर्माण नरेला के चौधरी रामदेव चौक के पास किया गया है। यहां पर कुल 100 बेड का अस्पताल भी तैयार है, इसके अलावा ओपीडी, डायग्नोसिस, सर्जरी, ओटी, लेबर वार्ड, आईसीयू, सीएसएसडी, साईकियाट्री आदि का निर्माण किया गया है।
नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ होम्योपैथिक में परास्नातक और शोध की सुविधाएं मौजूद रहेंगी। इसके अलावा आयुष में होम्योपैथिक से संबंधित आधारभूत क्षेत्रों, औषधि विकास, गुणवत्ताा नियंत्रण आदि विभिन्न पहलुओं पर कार्य होगा।
यह संस्धान होम्योपैथी की विभिन्न धाराओं के विशेषज्ञों को तैयार करेगा। संस्थान में सात विभाग हैं और यह होम्योपैथी की विशेषज्ञता से संबंधित स्नात्कोत्तर एवं डाक्टॉरल कोर्स उपलब्ध कराएगा। होम्योपैथी औषधियों के विकास, गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा मानक सहित होम्योपैथी के विज्ञान सम्मत विकास की मूल संकल्पनाओं पर यह संस्थान फोकस करेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान में यह संस्थान बैंचमार्क स्टैंडर्ड स्थापित करेगा।