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Written By: Yogita Yadav | Published : September 24, 2018 1:53 PM IST
महिलाओं के खतना संबंधित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की संवैधानिक पीठ को भेजा। © Shutterstock
महिलाओं के खतने (खफ्ज) के विरोध में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे 5 जजों की संवैधानिक पीठ को भेज दिया है। यह प्रथा दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में पाई जाती है। केंद्र सरकार भी इस प्रथा के विरोध में है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से महिलाओं का खतना किए जाने की प्रथा पर भारत में पूरी तरह से बैन लगाने की मांग की गई है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कहा गया है कि इसे संज्ञेय और गैरजमानती धारा के तहत अपराध माना जाए। सुप्रीम कोर्ट दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में प्रचलित नाबालिग लड़कियों का खतना किए जाने की प्रथा पर पहले सवाल उठा चुका है। वहीं इस प्रथा को बैन कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाक्रर्ता ने कहा है कि किसी के प्राइवेट पार्ट को छूना पॉस्को के तहत अपराध है।
बैन के समर्थन में सरकार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि धर्म की आड़ में लड़कियों का खतना करना जुर्म है और वह इस पर रोक का समर्थन करता है। इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से कहा जा चुका है कि इसके लिए सात साल तक कैद की सजा का प्रावधान भी है।
यूएन इसे 'मानवाधिकारों का उल्लंघन' मानता है
संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के मुताबिक, "एफ़जीएम की प्रक्रिया में लड़की के जननांग के बाहरी हिस्से को काट दिया जाता है या इसकी बाहरी त्वचा निकाल दी जाती है।" दिसंबर 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें एफ़जीएम को दुनिया भर से ख़त्म करने का संकल्प लिया गया था। महिला खतना के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे रोकने के मकसद से यूएन ने साल की 6 फ़रवरी तारीख़ को 'इंटरनेशनल डे ऑफ़ ज़ीरो टॉलरेंस फ़ॉर एफ़जीएम' घोषित किया है।
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ये हैं नुकसान
इस कुप्रथा से औरतों को आजादी दिलाने के लिए काम कर रही एक सामाजिक कार्यकर्ता बताती हैं कि खतना से औरतों को शारीरिक तकलीफ़ तो उठानी ही पड़ती है, इसके अलावा तरह-तरह की मानसिक परेशानियां भी होती हैं। उनकी सेक्स लाइफ़ पर भी असर पड़ता है और वो सेक्स एंजॉय नहीं कर पातीं। बचपन में खतना होने के बाद लड़कियों के लिए किसी पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि अक्सर घर के लोग ही उन्हें बहला-फुसलाकर खतना कराने ले जाते हैं।
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'सहियो' और 'वी स्पीक आउट' जैसी संस्थाएं भारत में एफ़जीएम को अपराध घोषित करने और इस पर बैन लगाने की मांग कर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, बेल्जियम, यूके, अमरीका, स्वीडन, डेनमार्क और स्पेन जैसे कई देश इसे पहले ही अपराध घोषित कर चुके हैं।
कौन हैं दाऊदी बोहरा समुदाय और क्या है प्रथा
दाऊदी बोहरा समुदाय मुख्यत: गुजरात से ताल्लुक रखता है जो विश्वभर में फैला हुआ है। यह समुदाय शिया मुसलमानों की एक शाखा है। समूह 'दाऊदी बोहरा विमिन्स असोसिएशन फॉर रिलीजस फ्रीडम' पहले ही कह चुका है कि ‘खफ्ज’ नुकसानरहित धार्मिक परंपरा है जिसका पालन सदियों से किया जा रहा है। महिलाओं के जननांग को विक्षत करना अवांछनीय है और इस पर रोक लगनी चाहिए।