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Type-2 diabetes रोगी करते हैं दिन में ये 2 काम तो 7 साल में हो सकती है मौत! स्टडी में दावा कैंसर का खतरा भी ज्यादा

Type-2 diabetes रोगी करते हैं दिन में ये 2 काम तो 7 साल में हो सकती है मौत! स्टडी में दावा कैंसर का खतरा भी ज्यादा

टाइप-2 डायबिटीज कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का एक प्रमुख कारण है, जिसमें ह्रदय रोग, किडनी से जुड़े रोग और स्ट्रोक शामिल है। ये स्थिति कुछ कैंसर के खतरे को बढ़ाने से भी जुड़ी हुई है।

Written by Jitendra Gupta |Published : September 19, 2022 7:58 PM IST

अगर आपको टाइप-2 डायबिटीज है तो आपकी बॉडी की कोशिकाएं आपके खाने से ग्लूकोज को सही तरीके से यूज नहीं कर पाती हैं। हमारा पैंक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन करता है, जो कोशिकाओं को ग्लूकोज का यूज करने में मदद करता है। लेकिन समय के साथ-साथ पैंक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन कम कर देता है, जिसकी वजह से कोशिकाएं, इंसुलिन के प्रतिरोधी हो जाती हैं। इसी वजह से हमारे रक्त में शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है।

टाइप-2 डायबिटीज कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का एक प्रमुख कारण है, जिसमें ह्रदय रोग, किडनी से जुड़े रोग और स्ट्रोक शामिल है। ये स्थिति कुछ कैंसर के खतरे को बढ़ाने से भी जुड़ी हुई है। अगर इस स्थिति का उपचार न किया जाए तो हाई ब्लड शुगर मौत का भी कारण बन सकती है।

ये दो कारक प्रमुख रूप से जिम्मेदार

एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन लोगों को टाइप-2 डायबिटीज है उन्हें अगले साल साल में कैंसर से मरने का खतरा ज्यादा होता है, खासतौर पर अगर वो धूम्रपान करते हैं या फिर शारीरिक रूप से असक्रिय रहते हैं।

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क्या कहता है शोध

डेनमार्क और स्वीडन में शोधकर्ताओं की टीम ने इन कारकों का अध्ययन किया। टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोग, जिन्हें इन कारकों ने प्रभावित किया उन्हें ब्रेस्ट, लंग, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा भी बढ़ गया। ये स्टडी 1998 से 2019 के बीच स्वीडिश नेशनल डायबिटीज रजिस्टर में शामिल टाइप-2 डायबिटीज के साढ़े छह लाख लोगों पर हुई थी। इसमें शामिल लोगों की औसत उम्र 63 साल थी और इनमें से 43 फीसदी महिलाएं थी।

ये हैं जोखिम कारक

इस 7 साल लंबे अध्ययन की शुरुआत में सभी लोग कैंसर मुक्त थे। अध्ययन के दौरान 32, 366 लोगों को ऊपर लिखे चार में से एक कैंसर का शिकार होना पड़ा था। अध्ययन के दौरान 179,627 लोगों की मौत भी हो गई थी। ये डेटा डायबिटीज से जुड़े बदलते जोखिम कारकों पर आधारित है, जिसमें HbA1c, कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन, बीएमआई, स्मोकिंग और शारीरिक रूप से सक्रिय जैसे जोखिम कारक शामिल हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना और धूम्रपान करना डायबिटीज और कैंसर से जान गंवाने वाले लोगों में काफी हद तक जुड़ा हुआ पाया गया।

कितना ज्यादा खतरा

डेटा के मुताबिक, धूम्रपान करने वाले लोगों को धूम्रपान न करने वाले लोगों की तुलना में इस अवधि के दौरान मरने का खतरा 2.15 गुना तक ज्यादा होता है। शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहने यानी सप्ताह में 3 से 5 दिन से भी कम करने वाले लोगों को डेढ़ गुना तक खतरा रहता है।

शोध के मुताबिक, धूम्रपान और एक्सरसाइज की कमी टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में, जिन्हें कैंसर नहीं है उनमें भी समय से पहले मृत्यु के बढ़े हुए खतरे से जुड़ा हुआ पाया गया है।

बदलनी होंगी ये आदतें

अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. लौरबर्ग का कहना है कि धूम्रपान और शारीरिक रूप से असक्रिय रहने जैसी आदतें डायबिटीज और कैंसर में योगदान देती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे निष्कर्ष ये संकेत देते हैं कि ये दोनों कारक न सिर्फ इन दोनों बीमारियों के होने में योगदान देते गैं बल्कि डायबिटीज और कैंसर के होने पर समय से पहले मौत की भी वजह बनते हैं।

उन्होंने कहा कि इसलिए ये जरूरी है कि क्लीनिक एक्सपर्ट और डॉक्टर्स को धूम्रपान और सक्रिय जीवनशैली जैसे कारकों पर ध्यान देने की जरूरत है फिर चाहे उम्र कोई भी हो।

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