मांझे से घायल दो लोगों की अस्पताल में सफल सर्जरी, एक्सपर्ट से जाने मांझे से घायल होने पर फर्स्ट एड टिप्स

15 अगस्त के मौके पर दिल्ली के लोगों को पतंग उड़ाना बहुत पसंद होता है। लेकिन पतंग का मांझा दूसरों की जान का दुश्मन बन जाता है। दिल्ली के मैक्स अस्पताल में पतंग के मांझे से कटे दो मरीजों की सफलतापूर्वक सर्जरी की जा चुकी है। डॉक्टर ने बताया इन दिनों मांझे से किस प्रकार बचें और चोट लगने पर क्या करें।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : August 5, 2022 4:26 PM IST

15 अगस्त आने वाला है और भारत अपना 75 स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। दिल्ली में भी इस दिन को धूमधाम से मनाया जाता है और तिरंगे व दूसरे रंगों के बने पतंगों को उड़ाते हैं। लेकिन पतंग उड़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मांझा जिसे चाइनीज मांझा भी कहा जाता है, कई बार दूसरे लोगों की जान का दुश्मन बन जाता है। अभी 15 अगस्त को 10 दिन बचे हुऐ हैं और पतंगों से होने वाली दुर्घटनाएं अभी से सामने आने लगी हैं। दरअसल, दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में दो ऐसे मामले आए जिन्हें देखकर किसी के भी रौंगटे खड़े हो जाएं। 61 वर्षीय विद्यावती के साथ भी पतंग के मांझे के साथ एक खतरनाक हादसा हुआ। पूर्व दिल्ली के इलाके में जब विद्यावति अपने टू-व्हीलर से जा रही थी, तो अचानक से उन्हें गले में अजीब सा दर्द हुआ और अगले ही पल उसे तेज दर्द महसूस हुआ। गर्दन पर हाथ लगाया तो उनका हाथ खून से लथपथ हो गया। गनीमत रही की आसपास खड़े पुलिसकर्मियों ने उन्हें देख लिया और नजदीकी अस्पताल में भर्ती करा दिया। लेकिन गले की चोट और हालत इतनी गंभीर थी की उन्हें मैक्स सुपर स्पेशलिटी पटपड़गंज अस्पताल में रेफर करना पड़ा।

ऐसा ही कुछ हुआ 54 वर्षीय उषा राजन के साथ जब वे मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंची तो उनके दाहिने पैर में मांझे के कारण एक गहरा कट लगा हुआ था। सड़क पार करने के दौरान उन्हें पिंडली पर मांझा लिपट गया और दुर्घटना कुछ ऐसी हुई की उनकी पिंडली को एड़ी की हड्डी से जोड़ने वाली मसल ही कट गई। खून इतना ज्यादा था कि सर्जरी के बिना स्थिति को कंट्रोल करना मुश्किल हो गया।

प्लास्टिक सर्जरी ही था ऑप्शन

हमने इन मामलों से जुड़े कुछ सवाल पूछने के लिए मैक्स सुपर स्पेशलिटी डिपार्टमेंट के हेड एंड सीनियर डायरेक्टर डॉक्टर मनोज के. जौहर से बात की। उन्होंने बताया कि विद्यावती के गले में इतनी गहरी चोट थी की खून बहने के कारण उनकी हालत सीरियस होती जा रही थी। गला इतना जख्मी हो चुका था कि उनकी तुरंत लाइफ सेविंग सर्जरी करनी पड़ी। डॉक्टर ने आगे बताया कि विद्यावती की न्यूरोवैस्कुलर और मसल रिपेयर के साथ सफल प्लास्टिक सर्जरी सफलतापूर्वक हो चुकी है और अभी वे रिकवर हो रही हैं।

मांझे की घटनाओं से कैसे बचें?

मांझे से चोट लगने का खतरा ज्यादातर 15 अगस्त के आसपास ही रहता है, क्योंकि इस दौरान काफी लोग पतंग उड़ाते हैं। डॉक्टर ने बताया कि इधर-उधर जाते समय आसपास ध्यान रखें, अगर आप टू व्हीलर चला रहे हैं तो ज्यादा स्पीड से न चलाएं और जितना हो सके सुरक्षित कपड़े पहनें। हेलमेट का उपयोग विशेष रूप से करें ताकि चेहरे को इस मांझे से बचाया जा सके। मांझे की चपेट में ज्यादातर वही लोग आते हैं, जो टू-व्हीलर चलाते हैं क्योंकि स्पीड ज्यादा होने के कारण मांझा दिखता नहीं है और त्वचा से रगड़ खाते ही काट देता है।

मांझे से चोट लगने पर क्या करें

डॉक्टर मनोज ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति मांझे की चपेट आ जाता है और उसे चोट लग जाती है, तो उसे प्रभावित हिस्से को किसी कपड़े से बांध लेना चाहिए। साथ में यह भी ध्यान रखे कि कपड़ा साफ-सुथरा हो, क्योंकि अगर कपड़ा साफ नहीं है तो उससे इन्फेक्शन भी हो सकता है। पूरा ध्यान खून को रोकने में ही लगाए और डेटॉल या मलम ढूंढने के चक्कर में न पड़ें। इसकी बजाय जितना हो सके डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर ने यह भी सलाह दी कि किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार से ठीक करने की कोशिश न करें। ऐसा करने से परेशानी उल्टा बढ़ सकती है और इलाज के दौरान जटिलताएं पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।

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