दुनिया की एक-तिहाई आबादी पर तपेदिक का खतरा : अध्ययन

अगर सुप्त टीबी यानी निष्क्रिय तपेदिक का मरीज अपना इलाज नहीं कराता है तो निष्क्रिय तपेदिक सक्रिय तपे‍दिक  में बदल सकती है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : August 3, 2019 8:21 PM IST

दुनिया की एक-तिहाई आबादी पर तपेदिक (Latent tuberculosis) का खतरा मंडरा रहा है। एक नए अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। यह अध्ययन यूरोपियन रेसपिरेटरी जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिससे पता चलता है कि दुनिया के हर चार में से एक व्यक्ति के शरीर में तपेदिक का बैक्टीरिया (Latent tuberculosis)  मौजूद है।

क्‍या है तपेदिक (Latent tuberculosis)

तपेदिक यानी क्षय रोग, माइक्रोबैक्टीरियम टुबरकोलोसिस नामक बैक्टीरिया से होता है, जिससे हर साल एक करोड़ लोग प्रभावित होते हैं और लगभग 20 लाख लोगों की मौत हो जाती है। यह सबसे घातक संक्रामक रोग है। इसके अलावा, कई लोग इस बैक्टिरीया से ग्रसित होते हैं, लेकिन उन्हें सक्रिय तपेदिक रोग नहीं होता है।

निष्क्रिय तपेदिक ज्‍यादा खतरनाक  (Latent tuberculosis)

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2035 तक दुनिया से तपेदिक को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। डेनमार्क के आरहौस यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्चियन वेजसे का कहना है, "इस लक्ष्य को उन लोगों का इलाज किए बिना प्राप्त करना मुश्किल है, जिन्हें सक्रिय तपेदिक रोग नहीं है। क्योंकि अगर शरीर में इसका बैक्टीरिया मौजूद है तो उस व्यक्ति को जीवन में कभी भी तपेदिक रोग हो सकता है।"

इस अध्ययन में कहा गया है कि दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी निष्क्रिय तपेदिक रोग की चपेट में है।

क्‍या है निष्क्रिय तपेदिक (Latent tuberculosis)

सुप्त अवस्था में संक्रमण तो होता है लेकिन टीबी का जीवाणु निष्क्रिय अवस्था में रहता है और कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। अगर सुप्त टीबी यानी निष्क्रिय तपेदिक का मरीज अपना इलाज नहीं कराता है तो निष्क्रिय तपेदिक सक्रिय तपे‍दिक  में बदल सकती है। लेकिन सुप्त टीबी ज्यादा संक्रामक और घातक नहीं है।

डराने वाले हैं आंकड़े  (Latent tuberculosis)

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के अनुसार विश्व में 2 अरब से ज्यादा लोगों को लेटेंट (सुप्त) टीबी यानी निष्क्रिय तपेदिक संक्रमण है। सक्रिय टीबी की बात की जाए तो इस अवस्था में टीबी का जीवाणु शरीर में सक्रिय अवस्था में रहता है तथा यह स्थिति व्यक्ति को बीमार बनाती है। सक्रिय टीबी का मरीज दूसरे स्वस्थ व्यक्तियों को भी संक्रमित कर सकता है इसलिए सक्रिय टीबी के मरीज को अपने मुंह पर मास्क या कपड़ा लगाकर बात करनी चाहिए और मुंह पर हाथ रखकर खांसना और छींकना चाहिए।

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