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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : February 23, 2019 6:10 PM IST
ट्राईक्लोसन नामक कैमिकल जो साबुन, टूथपेस्ट, फेसवॉश में मिलाया जाता है वह यूटीआई के लिए उपयोग की जाने वाली एंटीबायोटिक्स दवाओं के असर को कम कर देता है। जैसा की हम सभी जानते हैं अगर यूटीआई का सही से इलाज न हो तो यह जानलेवा हो सकता है। ©pixabay
टूथपेस्ट और हाथ धोने वाले साबुन का उपयोग हम सभी करते हैं लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। हाल ही में हुए एक शोध में यह पाया गया है कि टूथपेस्ट और हैंडवॉश में पाया जाने वाला एक कैमिकल एंटीबायोटिक्स के असर को कम करता है।
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शोधकर्ताओं नें अपने शोध में पाया कि ट्राईक्लोसन नामक कैमिकल जो साबुन, टूथपेस्ट, फेसवॉश में मिलाया जाता है वह यूटीआई के लिए उपयोग की जाने वाली एंटीबायोटिक्स दवाओं के असर को कम कर देता है। जैसा की हम सभी जानते हैं अगर यूटीआई का सही से इलाज न हो तो यह जानलेवा हो सकता है।
क्या कहते हैं पूर्व के शोध ?
ट्राईक्लोसन कैमिकल के बारे में पूर्व में भी शोध हो चुके हैं जिसमें यह पाया गया था कि इसकी वजह से लोगों में कोलन कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।
रिसर्च के दौरान ट्राईक्लोसन का प्रयोग चूहों पर किया गया। शोध के निष्कर्ष में कहा गया है कि थोड़े समय के लिए ट्राईक्लोसन की कम मात्रा से कोलन से जुड़ी सूजन शुरू हुई और कोलाइटिस से जुड़ी बीमारी बढ़ने लगी और कोलन से जुड़ा हुआ कैंसर चूहों में देखा गया।
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अमेरिका के मैसाचुएट्स-एमहेस्र्ट विश्वविद्यालय के गुओडोंग झांग ने कहा, "इन परिणामों से पहली बार पता चला है कि ट्राईक्लोसन का आंत के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है." पिछले शोध से पता चला था कि ट्राईक्लोसन की अधिक मात्रा का जहरीला प्रभाव पड़ता है, लेकिन स्वास्थ्य पर इसके कम मात्रा का प्रभाव अस्पष्ट था।
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इस नए शोध के लिए दल ने चूहों को ट्राईक्लोसन की विभिन्न मात्रा वाले आहार खिलाया. इसके परिणामों से पता चलता है कि मानव के खून के नमूनों की मात्रा वाले ट्राइक्लोसन की मात्रा चूहों पर इस्तेमाल करने से नियंत्रित जानवरों (चूहों) की तुलना में कोलन की सूजन ज्यादा विकसित दिखाई देती है। इसके बाद और ट्राइक्लोसन के इस्तेमाल से चूहों में कोलन संबंधी सूजन और गंभीर हो गई।