
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : May 13, 2026 2:40 PM IST
Trauma
Emotional trauma effects : ट्रॉमा इंसान के दिमाग और व्यवहार पर गहरा असर डालता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि ट्रॉमा किस उम्र में आपको ट्रॉमा मिला हुआ है। हाल ही में प्रकाशित एक नई स्टडी के अनुसार, बचपन में मिला ट्रॉमा और वयस्क उम्र में झेला गया ट्रॉमा दिमाग के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित करता है। इस लेख में हम स्टडी के बारे में विस्तार से समझते हैं। आइए जानते हैं-
रिसर्च में बताया गया है कि शुरुआती उम्र में होने वाला ट्रॉमा मुख्य रूप से दिमाग के उन हिस्सों को प्रभावित करता है, जो भावनाओं, डर और याददाश्त को कंट्रोल करते हैं। इनमें एमिग्डाला, हिप्पोकैम्पस और हाइपोथैलेमस शामिल हैं। यही कारण है कि बचपन में ट्रॉमा झेलने वाले लोगों में आगे चलकर चिंता, डर और भावनात्मक अस्थिरता ज्यादा देखने को मिलती है।
स्टडी के मुताबिक, बाद की उम्र में होने वाला ट्रॉमा प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को ज्यादा प्रभावित करता है। यह हिस्सा निर्णय लेने, सोचने और व्यवहार नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे लोगों में तनाव संभालने की क्षमता कमजोर हो सकती है और मानसिक दबाव अधिक महसूस हो सकता है।
इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रॉमा का असर सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर में हार्मोनल बदलाव, नींद की समस्या, थकान और इम्यून सिस्टम कमजोर होने जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते मानसिक स्वास्थ्य सहायता, थेरेपी और भावनात्मक सपोर्ट मिल जाए, तो ट्रॉमा के लंबे असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह रिसर्च PTSD और अन्य मानसिक समस्याओं के बेहतर इलाज की दिशा में मददगार साबित हो सकती है।