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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : November 30, 2019 7:49 PM IST
HIV वायरस शरीर में आने पर कमजोरी आने लगती है और कई बीमारियां होने लगती हैं. 8-10 सालों में बीमारियों के लक्षण साफ दिखने लगते हैं। ऐसे में एड्स होने की स्थिति पैदा होती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो इससे इंसान की जान भी चली जाती है। ©pixabay
विश्वभर में एचआईवी एड्स को सबसे खतरनाक बीमारी माना जाता है. कहा जाता है कि सेक्स वर्कर्स को ही एड्स जैसी बीमारी हो सकती है। एड्स के बारे में आप जानते ही हैं कि ये शारीरिक संबंध बनाने से ही होता है जो किसी को हो सकता है। अगर संबंध बनाते समय सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया तो ये हो सकता है।
चिकित्सकों का कहना है कि एड्स से संबंधित मौतों व नये संक्रमणों में कमी जरूर आ रही है लेकिन इसे खत्म करने की प्रक्रिया तेज नहीं हो पा रही है। चिकित्सकों के मुताबिक, वायरस का इलाज करने और इसे बड़े बच्चों में फैलने से रोकने संबंधी कार्यक्रम वहां नहीं हैं, जहां उन्हें होना चाहिए।
एचआईवी और एड्स में क्या अंतर है ?
एक सर्वे के मुताबिक, 2012 के सर्वे में 2.61 प्रतिशत महिला सेक्स वर्कर्स को एड्स हुआ, वहीं पुरुष के साथ सेक्स करने वाले 5.01 प्रतिशत पुरुषों को एड्स हुआ. 5.91 प्रतिशत नशीली दवाओं के इंजेक्शन लगाने वालों को और सबसे ज्यादा 18.80 प्रतिशत ट्रांसजेंडर्स को एड्स हुआ।
ये वायरस शरीर में आने पर कमजोरी आने लगती है और कई बीमारियां होने लगती हैं. 8-10 सालों में बीमारियों के लक्षण साफ दिखने लगते हैं। ऐसे में एड्स होने की स्थिति पैदा होती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो इससे इंसान की जान भी चली जाती है।
ज्यादातर लोग इन 4 वजहों से HIV का टेस्ट करवाने से कतराते हैं।
HIV पोजिटिव होना और एड्स अपने आप में बीमारी नहीं है। HIV पोजिटिव होने की वजह से शरीर कमजोर हो जाता है और बीमारी से लड़ने लायक नहीं होता और जिसकी वजह से कई बीमारियां लग जाती हैं और इसी के कारण आपकी जान पर बन सकती है। जानिए किन कारणों से एड्स होता है।
आपको अपनी एचआईवी स्थिति क्यों जाननी चाहिए ?
अनसेफ सेक्स अर्थात बिना कंडोम के अनजान इंसान के साथ सेक्स करना या एक इंसान का कई लोगों के साथ बीना कंडोम के सेक्स करना।
संक्रमित खून का आदान-प्रदान।
HIV पॉजिटिव महिला के बच्चे में।
एक बार इस्तेमाल की जानी वाली सुई को दूसरी बार यूज करने से।
इन्फेक्टेड ब्लेड यूज करने से।