AIIMS दिल्ली में आज से कॉस्मेटिक सर्जरी ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत, AI से एस्थेटिक सर्जरी के भविष्य पर फोकस

एम्स दिल्ली के प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव और बर्न सर्जरी विभाग द्वारा 24 अप्रैल से एस्थेटिक सर्जरी अपडेट 2026 का आयोजन किया जा रहा है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : April 24, 2026 11:43 AM IST

देश के प्रमुख मेडिकल संस्थान AIIMS दिल्ली में 24 अप्रैल से कॉस्मेटिक और एस्थेटिक सर्जरी पर एक विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत हो गई है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों और सर्जनों को आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैसे भविष्य में एस्थेटिक सर्जरी सुरक्षित और बेहतर रिजल्ट दे सकेगी, इसे शामिल किया गया है। 24 से 26 अप्रैल तक चलने वाले इस प्रोग्राम में भारत समेत 280 देशों के प्लास्टिक सर्जन शामिल होंगे। दिल्ली एम्स में इस कार्यक्रम की शुरुआत में विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंघल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि भारत में एस्थेटिक सर्जरी की मांग लगातार बढ़ रही है। एम्स में साल 2024 में 12 लाख से ज्यादा एस्थेटिक सर्जरी की गई थी। इसके बाद साल 2025 में एस्थेटिक सर्जरी का आंकड़ा 15 लाख तक पहुंच गया था। प्रो. मनीष सिंघल ने इस बात की जानकारी भी दी थी वैश्विक स्तर पर भारत एस्थेटिक सर्जरी के मामले में छठे स्थान पर है।

आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए एस्थेटिक सर्जरी का सहारा

एस्थेटिक सर्जरी ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत करते समय एम्स में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवांगी साहा ने कहा कि अब हर उम्र और हर वर्ग के लोग एस्थेटिक सर्जरी के इलाज की ओर बढ़ रहे हैं। एस्थेटिक सर्जरी सिर्फ सुंदर दिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाने में भी मददगार हो गई है। एस्थेटिक सर्जरी में सिर्फ दिल्ली एम्स ही नहीं बल्कि AIIMS पटना, AIIMS भुवनेश्वर और PGI चंडीगढ़ जैसे संस्थान भी इस क्षेत्र में सुरक्षित और व्यवस्थित ट्रेनिंग को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि देश में इस प्रकार की सर्जरी का भविष्य बेहतर बनाया जा सके।

सिर्फ दिल्ली ही नहीं देश के अन्य एम्स में भी एस्थेटिक सर्जरी की जा रही है। सिर्फ दिल्ली ही नहीं देश के अन्य एम्स में भी एस्थेटिक सर्जरी की जा रही है।

AIIMs एस्थेटिक सर्जरी ट्रेनिंग प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य

  1. कॉस्मेटिक और एस्थेटिक सर्जरी में नई तकनीकों की ट्रेनिंग
  2. AI आधारित टूल्स और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सिखाना
  3. मरीजों की जरूरतों के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान बनाना
  4. सर्जरी के जोखिम को कम करना और बेहतर रिजल्ट आ सके

एस्थेटिक सर्जरी में AI की भूमिका बढ़ी

डॉ. शिवांगी शाहा ने कहा कि आज के समय में AI टेक्नोलॉजी तेजी से हेल्थकेयर सेक्टर में अपनी जगह बना रही है, खासकर एस्थेटिक सर्जरी में AI के जरिए मरीज के चेहरे और शरीर का 3D एनालिसिस किया जा सकता है। इससे सर्जरी से पहले ही संभावित परिणाम का सिमुलेशन देखा जा सकता है और डॉक्टर ज्यादा सटीक और सुरक्षित तरीके से सर्जरी प्लान कर सकते हैं। एस्थेटिक सर्जरी में AI आने से न सिर्फ डॉक्टरों का काम आसान होता है, बल्कि मरीजों का भरोसा भी बढ़ता है।

मरीजों के लिए क्यों है यह अहम?

डॉ. शिवांगी शाह ने बताया कि दिल्ली AIIMs द्वारा की गई इस पहल का सबसे बड़ा फायदा मरीजों को मिलने वाला है। इससे मरीजों को पहले ज्यादा सुरक्षित सर्जरी मिल सकेगी। एस्थेटिक सर्जरी में AI का इस्तेमाल होने से मरीजों को ज्यादा सुरक्षित सर्जरी मिल सकेगी, रिस्क कम होगा और सर्जरी के बाद जो रिकवरी टाइम है, वो भी घटाने में मदद मिलेगी।

जानकारी के लिए बता दें कि भारत में कॉस्मेटिक और एस्थेटिक सर्जरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में AI का उपयोग इस क्षेत्र को ज्यादा सुरक्षित बना सकता है।

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