
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : October 1, 2018 5:28 PM IST
It is important to go for a rehab after a heart attack. © Shutterstock
यूरोपीय हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि एचडीएल के उच्च स्तर वाले लोगों को सामान्य कोलेस्ट्रॉल के स्तर वाले लोगों की तुलना में मृत्यु का काफी अधिक जोखिम उठाना पड़ा।
कंपनियों द्वारा की जाने वाली सामाजिक पहल के एक हिस्से के रूप में, वोकहार्ट अस्पताल-मुंबई सेंट्रल ने 1,000 से अधिक स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए- जिसमें शहर के दक्षिण-पश्चिम, मध्य और पश्चिमी मुंबई के विभिन्न हिस्सों को शामिल किया गया। 2 साल (2016-2018) की अवधि तक चले इन शिविरों के ज़रिये विभिन्न हाउसिंग सोसायटी और निजी और सरकारी कंपनियों तक पहुंचने की कोशिश की गई।
खाने की आदतें और अन्य जीवनशैली कारक हृदय रोगों के जोखिम कारक को निर्धारित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं और वे इस स्थिति को रोक या यहां तक कि इसे उलट भी सकते हैं। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर, वोकहार्ट अस्पताल ने कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग के बीच संबंध की जांच करने के लिए लिपिड प्रोफाइल पर एक अध्ययन किया। जमा किए गए आंकड़े कोलेस्ट्रॉल की वास्तविक तस्वीर और अप्रत्यक्ष रूप से संभावित दिल के दौरे के जोखिम के बारे में बता सकते हैं।
2016- 2018 तक लिपिड प्रोफाइल जांच कराने वाले 10,595 लोगों के नमूने लेकर अध्ययन आयोजित किया गया था। जिनमें से 66% पुरुषों और 34% महिलाओं पर हृदय संबंधित बीमारियों के जोखिम कारक जानने के लिए जांच की गई। यह देखा गया कि इनमें से 30% से अधिक में उच्च कोलेस्ट्रॉल है, जिसमें 18% पुरुष और 12% महिलाएं हैं। अध्ययन से पता चलता है कि 36-50 वर्ष के कम आयु वर्ग की महिलाओं में उच्च जोखिम कारक है, पुरुषों की तुलना में 18%, जो केवल 10% हैं।
साथ ही एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का पता लगाने के लिए 5,024 लोगों की जांच की गई। यह आपके रक्त वाहिकाओं की दीवारों में एकत्रित होता है, जहां यह अवरोध पैदा कर सकता है। एलडीएल का उच्च स्तर वहां अचानक बनने वाले खून के थक्के के ज़रिये आपको दिल के दौरे के प्रति ज़्यादा जोखिम में डाल देते हैं। जांच में एक महत्त्वूपूर्ण तथ्य सामने आया कि 32% महिलाएं जिनको इस जांच में शामिल किया गया उनमें से 21% में उच्च एलडीएल कोलेस्ट्रॉल है।
अगली बात जिसका पता लगाया गया, वह यह है कि एचडीएल कोलेस्ट्रॉल सामान्य से कम है या नहीं। इस श्रेणी के तहत जांच में शामिल किए गए 5,024 लोगों में से 32% में यह कम पाया गया, इससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की जांच के लिए 31% महिलाओं की जांच की गई और चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। 12% से अधिक महिलाओं में दिल की बीमारी के विकास के लिए यह एक प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर पाया गया है। अगर खराब कोलेस्ट्रॉल से अच्छे कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल से एचडीएल का अनुपात बदलता है या अनुकूल नहीं होता है तो आघात, दिल का दौरा और परिधीय संवहनी रोग का उच्च जोखिम हो सकता है।
ट्राइग्लिसराइड की जांच के लिए 5,024 लोगों में से एक और महत्वपूर्ण खोज सामने आई। 39% महिलाओं को जांचा गया, 10% में सामान्य से अधिक ट्राइग्लिसराइड के स्तर पाए गए। यह तला हुआ भोजन, व्यायाम की कमी, घर पर इस्तेमाल होने वाली तेल की खराब गुणवत्ता आदि के कारण हो सकता है, जो भारतीयों की एक अनूठी विशेषता है और एक जोखिम कारक है, जिस पर उचित देखभाल के साथ विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
वोकहार्ट अस्पताल, दक्षिण मुंबई में सलाहकार हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिक सोनी का कहना है, "हृदय संबंधित बीमारी पोषण, जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़े कारकों की एक विस्तृत श्रृंखला के कारण होती है। अत्यधिक तनाव, उचित व्यायाम की कमी और आहार, उच्च संपूर्ण कोलेस्ट्रॉल की तुलना में ज़्यादा हानिकारक होते हैं।"
वोकहार्ट अस्पताल, मुंबई सेंट्रल में सलाहकार हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ गोयल कहते हैं, "भारतीयों में लिपिड के अनोखे नमूने होते हैं जो उन्हें हृदय रोग के उच्च जोखिम में डाल देते हैं। चिकित्सीय पर्यवेक्षण के तहत नियमित सुरक्षात्मक जांच और उचित चिकित्सा, हृदय रोग को रोकने और जीवन के जोखिम को कम करने में लंबे समय तक फायदा पहुंचा सकते हैं।"