
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : June 23, 2021 10:37 AM IST
कोरोना की पहली लहर ने देश को उतना नुकसान नहीं पहुंचाया था जितना कि दूसरी लहर से लोग प्रभावित हुए थे। मई 2021 में कोरोना की दूसरी लहर पीक पर थी और 1 दिन में कोविड के नए मामले 4 लाख तक दर्ज होने लगे थे। कोविड की दूसरी लहर में जहां मेडिकल फेसिलिटी की असली पुल खुली वहीं मौत का तांडव भी किसी से छिपा नहीं। हालांकि अभी स्थिति कंट्रोल में है और संक्रमण में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। लेकिन एक्पर्ट का दावा है कि अगर भारत कोरोना की तीसरी लहर (Corona Third Wave In India In Hindi) के लिए तैयार नहीं हुआ तो भारी नुकसान होने की पूरी संभावना है। कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए कुछ ऐसी चीजें हैं जिन पर तेजी से काम करने की जरूरत है।
जब एक कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति टेस्ट कराने धर से कई किलोमीटर दूर जाता है तो लंबी लाइन देखकर या कूपन न मिलने के कारण वापिस आ जाता है। इस बात की क्या गारंटी है कि वो दोबारा टेस्ट कराने जाएगा या जब तक टेस्ट नहीं होता वो खुद को आइसोलेट रखेगा? ऐसे लोग जाने अनजाने में दूसरों को भी संक्रमित करते हैं। कोरोना फैलने के पीछे सबसे बड़ा कारण टेस्टिंग का अभाव है। बिहार और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां कोरोना टेस्टिंग बहुत कम हुई है। इसलिए कोरोना की तीसरी लहर (Corona Third Wave In India) की तैयार के लिए टेस्टिंग अभी से तेज होनी चाहिए।
National Statistical Office (NSO) का डाटा बताता है हमारे देश की गरीब जनता केवल जान का जोखिम होने या गंभीर स्थितियों में ही डॉक्टर के पास जाती है। डॉक्टर की फीस और दवाईयों का खर्चा अफोर्ड न कर पाने के कारण देश की गरीब जनता सर्दी, जुकाम या बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह नहीं ले पाती। देश के 20% लोग ऐसे हैं जो अमीरों की तुलना में 3 गुना कम अस्पतालों का रुख कर पाते हैं। इसके साथ ही अगर कोरोना की तीसरी लहर में किसी गरीब व्यक्ति को कोरोना के साथ ब्लैक फंगस (Black Fungus) या कोई दूसरी परेशान हो गई तो अस्पताल वाले इलाज से पहले ही लाखों रुपये जमा करने को कहते हैं। सोचने वाली बात है कि जिन लोगों का घर रोज की कमाई से चल रहा है वो एक झटके में लाखों रुपये कहां से ले आएंगे? सरकारी अस्पतालों में बेड मिलता नहीं है और प्राइवेट वाले इलाज या ऑपरेशन शुरू करने से पहले ही पैसा जमा करने को बोलते हैं। इसलिए अभी वक्त है कि सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और गरीबों को डॉक्टर की मदद आसानी से कैसे मिले इस दिशा में कोई हल निकालना चाहिए। क्योंकि अगर कोरोना की तीसरी लहर (Corona Third Wave In India) में संक्रमण गांव में फैल गया और अभी से कोई प्रयास न किया गया तो स्थिति बद से बदतर हो सकती है।
प्रशासन केवल नियम बना सकता है, उनका पालन करना आम जनता का फर्ज है। अगर सरकार ने कोरोना प्रोटोकॉल में सोशल डिस्टेंसिंग, सेनिटाइजर का इस्तेमाल, मास्क पहनने और तय समय में ही बाहर निकलने का नियम बनाया है तो इसका पालन किया जाना चाहिए। अगर वर्तमान स्थिति देखें तो ऐसा पूरी तरह से नहीं हो रहा है। इसलिए सरकार को कुछ ऐसी व्यवस्था करने की जरूरत है जिससे कोरोना नियमों का हर हालत में पालन किया जाए, ताकि संक्रमण को रोकने में मदद मिल सके। वर्तमान में कई राज्य धीरे-धीरे लॉकडाउन हटा रहे हैं, ऐसे में लोगों का लापरवाह होना लाजमी है। अगर अचानक से तीसरी लहर आती है तो ये उम्मीद करना कि सब लोग रातों रात कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करेंगे ये उचित नहीं है। हालांकि ऐसा होना चाहिए, लेकिन देश की इतनी बड़ी जनता है और सब के सोचने का तरीका अलग है। इसलिए लोगों के मन में कोरोना के प्रति गंभीरता कैसे बनी रहे, लोग लापरवाह न हो और तीसरी लहर (Corona Third Wave In India) के लिए तैयार रहें इस ओर भी भारत को काम करने भी जरूरत है।