यूपी हो या हरियाणा बच्चा नहीं होगा वायरल फीवर का शिकार, करें बचाव के आसान उपाय

वायरल, डेंगू, मलेरिया के बढ़ते जोखिम पर स्वाभाविक रूप से इन बीमारियों के होने की शंका हो सकती है। ऐसे में आप बचाव के ये आसान उपाय अपना सकते हैं।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : September 23, 2021 8:20 PM IST

कुछ इलाकों के बच्चे बुखार की चपेट में आ रहे हैं, रिपोर्ट्स के ही मुताबिक़ इसके लक्षण डेंगू, वायरल, टायफाइड आदि से मिलते जुलते हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। इस बुखार की मूल वजह क्या हो सकती है इसपर व्यापक चर्चा हो रही है। इसके अलावा कोविड, डेंगू, मलेरिया आदि भी चिंता के विषय बने हुए हैं। अभी के मौसम को देखते हुए वायरल, डेंगू, मलेरिया आदि का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में लगातार बुखार के लक्षण होने पर स्वाभाविक रूप से इन बीमारियों के होने की शंका हो सकती है। धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल इंटरनल मेडिसिन सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर गौरव जैन का कहना है कि इन रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चों में होने वाला बुखार अरबोवायरस या एडीनोवायरस हो सकता है, क्योंकि इसके कुछ मामलों में देखा गया है कि एडीनोवायरस की दवा व उससे सम्बंधित इलाज प्रक्रिया का सकारात्मक परिणाम दे रही है। लेकिन फिर भी इसकी अंतिम रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती, यह व्यापक जांच और अध्ययन का विषय है। इस दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं।

बचाव के उपाय :-

एडीनोवायरस की यदि बात करें तो यह एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति में फैलने वाला वायरस है, इसलिए बच्चों के सन्दर्भ में देखें तो वे बेपरवाह होकर एक दूसरे के साथ घुल मिलकर खेलते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन इस सन्दर्भ में भी ज़रूरी है। खासकर ऐसे इलाकों में जहां इसका फैलाव हो वहां किसी को यदि खांसी, जुखाम, बुखार आदि हो तो उससे सामाजिक दूरी बनाते हुए उनका ख्याल रखें।

उपरोक्त बिंदु के ही सन्दर्भ में यदि देखें तो बच्चे मास्क पहनने में सहज मसहूस नहीं करते। अभी के दौर में कोविड, वायरल व अन्य कुछ संक्रामक रोगों से बचाव में मास्क अहम भूमिका अदा कर सकता है। बच्चों को मास्क की अहमियत के बारे में समझाएं और इसे पहनने के लिए प्रेरित करें।

मौलिक स्वच्छता बनाकर रखें। अपने आस पास गंदगी न रहने दें जो बीमारी वाले बैक्टीरिया व वायरस के लिए अनुकूल हो।

स्वच्छ जल का सेवन करें। पोषण का विशेष ध्यान रखें, इम्युनिटी के लिए सबसे पहले पोषण ज़रूरी है। बच्चों को संतुलित आहार दें व स्वयं भी लें।

खान पान आदि की प्रक्रिया व भोजन तैयार करने के हरेक स्तर पर विशेष रूप से स्वच्छता का ध्यान रखें।

सब्जियां, फल आदि का सेवन करने या पकाने से पहले अच्छी तरह से धोएं।

घरेलू उपचार करने से विशेष तौर पर बचें। अक्सर देखा गया है कि बहुत से लोग बुखार व पेट की समस्याओंमें घर में ही तरह- तरह के उपचार करके समस्या से निजात के बारे में सोचते हैं। लेकिन जरूरी जांच व परामर्श के बिना बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए ख़ास कर अभी के दौर में जब एक बुखार को लेकर व्यक्ति कोविड, डेंगू, मलेरिया, वायरल आदि की शंका में पड़ सकता है, ऐसे में केवल डॉक्टर से ही सलाह लेकर इलाज की दिशा तय करें।

किसी भी बुखार को नज़रंदाज़ न करें, शरीर का तापमान 98.6 फारेनहाईट या इससे अधिक मिलने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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