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Written By: Anshumala | Published : August 4, 2019 1:12 PM IST
If left untreated, hepatitis can lead to complications such as cirrhosis, liver failure, and liver cancer. © Shutterstock
हर साल ''विश्व हेपेटाइटिस दिवस'' के अवसर पर हेपेटाइटिस की बीमारी और बचाव के उपायों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है। हेपेटाइटिस बी और सी के उपचार में प्रगति और विकास के बावजूद, जनता में जागरूकता की कमी के कारण इन दोनों ही बीमारियों को कम करना मुश्किल है। विश्व स्तर पर, लगभग 350 मिलियन लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस बी से जूझ रहे हैं और यह लिवर की विफलता और कैंसर का प्रमुख कारण बन रहा है।
केवल 10% से 15% आबादी इसके कारणों से अनजान है, जिसके कारण वे इस बीमारी की पहचान नहीं कर पाते हैं। सभी देशों में, भारत चौथे स्थान पर है, जो पुरानी हेपेटाइटिस के वैश्विक प्रतिशत का लगभग 50% वहन करता है।
सरोज सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी के एचओडी, डॉ. रमेश गर्ग ने बताया कि लिवर का काम प्रोटीन, एंजाइम और अन्य पदार्थों का उत्पादन करके पाचन में मदद करना है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करता है और भोजन से ऊर्जा उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया में असामान्यता एक बीमारी का गंभीर संकेत है कि लिवर अच्छी तरह से काम नहीं कर रहा है। लिवर की इस असामान्यता पर लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) किया जा सकता है, जिसमें विश्लेषण के लिए रक्त का नमूना लिया जाता है।
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इस बीमारी में व्यक्ति के लिवर में सूजन आ जाती है। इसके होने का प्रमुख कारण वायरस या संक्रमण है। इसके सभी लक्षण एक दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं इसलिए बिना निदान के इनके बीच के फर्क को पहचाना नहीं जा सकता है। हेपेटाइटिस पूरे भारत को अपनी चपेट में ले चुका है। नियमित रूप से जांच और निदान न करवाने के कारण ही बीमारी की पहचान नहीं हो पाती है जो समय के साथ गंभीर होती चली जाती है। इसके अन्य कारणों में टैटू करवाना, फूड सप्लीमेंट का सेवन, ड्रग्स इंजेक्ट करना आदि शामिल हैं।
हेपेटाइटिस वायरस 5 प्रकार के होते हैं- ए, बी, सी, डी और ई, जिसमें ए और ई संक्रमित भोजन और पानी से फैलते हैं। बी, सी और डी रक्त से जन्म लेते हैं और हेपेटाइटिस डी केवल उन लोगों में ही होता है जो पहले से ही हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होते हैं। हेपेटाइटिस बी को लेकर ध्यान देने वाली बात यह है कि एक मिहला जो इस वायरस से संक्रमित है, वह अपने होने वाले बच्चे को भी हेपेटाइटिस बी से संक्रमित कर देती है।
इसके 90% मामले मां का संक्रमण बच्चे में फैलने से होते हैं, इसलिए प्रेग्नेंसी के वक्त होने वाली मां की जांच करके यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं वह हेपेटाइटिस बी से संक्रमित तो नहीं है। यदि वह संक्रमित है तो वैक्सीन और उपचार से समय पर बचाव किया जा सकता है। हेपेटाइटिस सी का अब पूरा इलाज उपलब्ध है, इसलिए अब इससे छुटकारा पाना मुश्किल नहीं है।