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Written By: Editorial Team | Updated : June 12, 2018 9:44 PM IST
क्या आप अपनी यौन इच्छाओं और यौन क्रियाओं को बताते हुए सहज रहते हैं? आपको तब कैसा लगता है जब आपके रिश्ते को अपराध का दर्जा दे दिया जाता है।
एलजीबीटीक्यूआई (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर और इंटरसैक्स) समुदाय लंबे समय से ऐसे प्रश्नों का सामना करते आ रहे हैं, अपने अधिकारों के लिए लड़ते आ रहे हैं, और वे इसके लिए तबतक दृढ़ हैं, जबतक वे भारत का गौरव न बन जाएं।
भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के अनुसार, किसी भी समलैंगिक गतिविधि को आपराधिक श्रेणी में लाने वाला कानून न केवल पुराना और अनुचित है, बल्कि औपनिवेश कालीन अपराध के बाद का खुमार है।
समुदाय के लिए जून गर्व का महीना है, लेकिन समुदाय के लोग कहते हैं कि वे खुद को अभी भी हाशिये पर महसूस करते हैं। वे जोर देकर कहते हैं कि भारत में गुलाबी मुद्रा की जरूरत है, जो गे समुदाय की क्रय शक्ति को वर्णित करती है।
गे अधिकारों के लिए काम करने वाले प्रसिद्ध कार्यकर्ता और ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी समूह के कार्यकारी निदेशक केशव सूरी ने आईएएनएस से कहा, कोई देश तबतक प्रगति नहीं कर सकता जबतक उसकी एक बड़ी जनसंख्या भय के वातावरण में जीती है या भेदभाव का अनुभव करती है। धारा 377 औपनिवेश कालीन अपराध के बाद का खुमार है। गलत को ठीक करने के लिए हमारे पास 70 साल थे।
सूरी ने कहा, हमें अपने मानवाधिकारों और खुद के लिए जिम्मेदारी उठानी शुरू करनी चाहिए। एलजीबीटीक्यूआई समुदाय आज लाखों में हैं। अब हम उन्हें हाशिए पर नहीं रख सकते। भारत को आज गुलाबी मुद्रा की भी जरूरत है, आज जिसकी बड़ी मात्रा मौजूदगी है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2009 में आदेश दिया था कि धारा 377 असंवैधानिक है, लेकिन दिसंबर 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश को निरस्त कर दिया।
इस आदेश को निरस्त करने के लिए उनके पास हालिया याचिकाएं हैं। शेफ ऋतु डालमिया के साथ नवतेज जौहर, सुनील मेहरा, आएशा कपूर और अमन सेठ ने धारा 377 की वैधता को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है।
नाम जाहिर न करने की शर्त पर एक याचिकाकर्ता ने आईएएनएस को बताया, संवैधानिक लोकतंत्र में धारा 377 का कोई स्थान नहीं है। याचिकाकर्ता समुदाय को समानता, सम्मान और भाईचारे का अधिकार मांग रहे हैं।
वेब श्रंखला माया 2 में लेस्बियन का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री लीना जुमानी का कहना है कि सरकार को एलजीबीटी समुदाय को यह चुनने का अधिकार देना चाहिए कि वे किससे प्यार करें और किसके साथ अपना जीवन जीएं।
सूरी ने ब्रिटेन की प्रधानमंत्री द्वारा भारत या पूर्व में ब्रिटेन के अधीन रहे अन्य देशों में समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखने की निंदा करने का उल्लेख किया।
सूरी ने कहा, हमें खुद को, दोस्तों, सहकर्मियों, नागरिकों, बच्चों को सभी को स्वीकार करने और सबका सम्मान करना सिखाना होगा।
अन्य याचिकाकर्ताओं की तरह आशावादी आएशा कपूर का कहना है कि इस चर्चा में मीडिया सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। मेरी तरह लाखों भारतीयों में एक उम्मीद और सकारात्मकता है।
स्रोत:IANS Hindi.
चित्रस्रोत:Shutterstock.