नाइट शिफ्ट में काम करने वालों को होता है अस्थमा का ज्यादा खतरा, सावधानियां है जरूरी

हाल ही में आई एक स्टडी में साफ हुआ है कि जो लोग पर्मानेंट नाइट शिफ्ट में काम करते हैं उन्हें अस्थमा रोग का काफी खतरा है। जर्नल थोरैक्स में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में हर 5 में 1 ऐसा व्यक्ति जो हमेशा नाइट शिफ्ट में काम करता है उसे अस्थमा का काफी खतरा है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : November 18, 2020 11:31 AM IST

हाल ही में आई एक स्टडी में साफ हुआ है कि जो लोग पर्मानेंट नाइट शिफ्ट में काम करते हैं उन्हें अस्थमा रोग का काफी खतरा है। जर्नल थोरैक्स में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में हर 5 में 1 ऐसा व्यक्ति जो हमेशा नाइट शिफ्ट में काम करता है उसे अस्थमा का काफी खतरा है। शिफ्ट में काम करने वाले व्यक्ति के आंतरिक शरीर की घड़ी (सर्कैडियन लय) को बाहरी प्रकाश और अंधेरे चक्र के साथ बाहर होने का कारण बनता है। "मिसलिग्न्मेंट यूके में मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के लेखकों के अध्ययन के अनुसार," यह कई मेटाबॉलिक डिसऑर्डर, हृदय रोग और कैंसर के खतरे में वृद्धि का कारण बनता है।

अस्थमा के लक्षण, जैसे कि घरघराहट और वायुमार्ग से सीटी निकलने जैसे लक्षण दिन और रात के समय अलग अलग होते हैं। और शोधकर्ता अपनी रिसर्च में यह पता लगाना चाहते थे कि क्या शिफ्ट का काम अस्थमा और इसकी गंभीरता के जोखिम से भी जुड़ा हो सकता है या नहीं।

नाइट शिफ्ट में काम करने वालों के लिए खास टिप्स

1. ब्रेक्स के दौरान हर घंटे अपनी सीट से कुछ मिनटों के लिए उठें और स्ट्रेचिंग करें। इससे आपकी कंधे, गर्दन और पीठ की मांसपेशियां खिचेंगी। मांसपेशियों के तनाव से ब्लड फ्लो कम होता है। स्ट्रेचिंग से ब्लड फ्लो बढ़ता है और मांसपेशियों से तनाव कम होता है। इससे आपको दिन में सोने में भी मदद मिलेगी।

2. डिनर में बहुत भारी खा लेने से आपको रातभर थकान महसूस हो सकती है इसलिए एक साथ ज्यादा खाने की बजाए थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाएं। बहुत देर से भी न खाएं, शरीर का बाकी सिस्टम बिगड़ सकता है।

3. बार-बार अपनी शिफ्ट न बदलें, इससे आपकी बॉडी क्लॉक पर असर पड़ता है। अगर आप नाइट शिफ्ट में काम करते हैं तो सुबह सनग्लासेस पहनकर लौटें। ये आपको सूरज की किरणों से इंटरनल डे टाइम क्लॉक एक्टिवेट करने से बचाएगा।

4. कैफीन के सेवन से बचें। इनकी जगह जूस, पानी और दूध लें।

अस्थमा रोगी रखें इन बातों का ख्याल

1. कई बार दमा रोगियों के लिए कमरे की हवा ही परेशानी का सबब बन जाती है। अगर कमरे के अंदर धूल के कण ज्यादा होते हैं, तो दमा रोगी को रात में अटैक हो सकता है।

2. जब रात के समय एयरकंडीशनर की वजह से तापमान बहुत कम होता है, तो अस्थमा रोगी को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कई बार दमा का अटैक इतना खतरनाक होता है कि रोगी का दम उखड़ने लगता है।

3. अस्थमा या दमा रोगी को कभी-कभी आंतरिक कारण से भी रात के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है। दमा रोगी को सोते समय सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। यह अक्शर सांस की नली में संकुचन की वजह से होता है।

4. अस्थमा या दमा के लिए वायु प्रदूषण और धूल बहुत बड़ा दुश्मन है। वायु प्रदूषण की वजह से कमरे की हवा खराब होती है. कई बार धूल की वजह से बिस्तर में भी धूल के कण रह जाते हैं, जो रात में दमा के अटैक का कारण बनते हैं।

5. सीलन और नमी- घर के अंदर अगर सीलन और नमी है तो यह दमा रोगी के लिए खतरनाक है। दमा रोगियों को सीलन वाले कमरे में नहीं रहना चाहिए। सोते समय सीलन और नमी के कारण अस्थमा का अटैक हो सकता है।

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