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ब्लड शुगर कंट्रोल करने में काम नहीं आता ये वाला विटामिन! स्टडी में दावा बस नाम का है ये विटामिन

ब्लड शुगर कंट्रोल करने में काम नहीं आता ये वाला विटामिन! स्टडी में दावा बस नाम का है ये विटामिन

Vitamin B1 in Diabetes : शोध के मुताबिक, विटामिन बी1 (थियामिन) सप्लीमेंटशन, विशेषतौर पर रोजाना तीन महीने तक 100 से 900 एमजी की डोज से टाइप-2 डायबिटीज रोगियों में ग्लाइसिमिक परिणामों पर कोई खास असर नहीं पड़ता है।

Written by Jitendra Gupta |Published : September 20, 2022 3:41 PM IST

Vitamin B1 in Diabetes : टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ग्लाइसिमिक परिणामों पर थियामिन सप्लीमेंटेशन के प्रभाव नाम के अध्ययन में इस बीमारी के शिकार मरीजों पर सप्लीमेंट के ग्लाइसिमिक परिणामों की प्रभाविकता को जांचने की कोशिश की गई। ये अध्ययन जर्नल बीएमजे ओपन में प्रकाशित हुआ है, जो आपके द्वारा लिए जाने वाले विटामिन के डायबिटीज पर प्रभाव को दर्शाता है।

शोध के मुताबिक, विटामिन बी1 (थियामिन) सप्लीमेंटशन, विशेषतौर पर रोजाना तीन महीने तक 100 से 900 एमजी की डोज से टाइप-2 डायबिटीज रोगियों में ग्लाइसिमिक परिणामों पर कोई खास असर नहीं पड़ता है।

पहले हुए कई शोध के आधार पर ये देखा गया कि इन मरीजों को थियामिन की कमी का सामना करना पड़ा था। चूंकि इस तरह के सप्लीमेंट की सलाह दी जाती है ताकि ब्लड ग्लूकोज को कंट्रोल करने के लिए जेब पर ज्यादा भार न पड़े।

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डायबिटीज रोगियों की दी जा रही सलाह

शोधकर्ताओं का कहना है कि टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में ग्लाइसिमिक परिणामों को बेहतर बनाने के लिए विटामिन सप्लीमेंटशन की सलाह दी जाती है। एक विटामिन, जिसकी बारीकी से जांच की जा रही है, उसे थियामिन यानी विटामिन बी1कहते हैं। हालांकि थियामिन सप्लीमेंटेशन ग्लाइसिमिक परिणामों को प्रभावित नहीं करता है। थियामिन ट्राईगिलिसेराइड्स को कम करने के साथ-साथ एचडीएल को बढ़ाने का काम करता है।

इन चीजों कों जांचा गया

शोधकर्ताओं ने छह ट्रायल की जांच की, जिसमें करीब 364 लोग शामिल थे। इन लोगों के ग्लाइसिमिक परिणामों को आंका गया जैसे HbA1c, फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और खाना खाने के बाद ब्लड ग्लूकोज को जांचा गया। पांच लोगों में प्लेसेबो कंट्रोल आरसीटी किया गया जबकि आखिरी ट्रायल में क्रॉस ओवर आरसीटी किया गया।

ये स्टडी छह देशों में की गई, जिसमें पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, नीदरलैंड, हंगरी और मैक्सिको शामिल है। इस अध्ययन में महिलाओं और पुरुषों की संख्या लगभग एक समान थी।

पाया गया अंतर

इन दो ट्रायल से निकलकर आए डेटा में ये पाया गया कि HbA1c लेवल पर प्लेसेबो समूह के खिलाफ थियामिन के प्रभाव की जांच की गई और दोनों समूहों के बीच महत्वपूर्ण अंतर पाया गया। ट्रायल में सामने आए महत्वहीन परिणामों में बेंफोटियामाइन सप्लीमेंट की अलग-अलग डोज शामिल है। थियामिन और प्लेसेबो ग्रुप के बीच तीनों ट्रायल में फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज लेवलके बीच महत्वपूर्ण अंतर पाया गया।

ये दो चीजें करता है कम

हालांकि इस रिव्यू में सभी कुछ उतना अच्छा नहीं था। इन तीनों ट्रायल के नतीजों में तीन महीने के फॉलो अप पीरियड में एचडीएल लेवल में वृद्धि पाई गई है। इस समीक्षा के नतीजे दिखाते हैं थियामिन का ग्लाइसिमिक परिणामों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि ये बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और एचडीएल को बढ़ाता है।

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