Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
जीवनशैली की खराब हो रही आदतों और नई-नई बीमारियों के कारण मानव स्वास्थ्य संकट में पड़ रहा है। पिछले कुछ सालों में दिल की बीमारियों का खतरा (Heart disease risks) काफी बढ़ा है। पहले सिर्फ बुजुर्गों और अन्य किसी रोगों से ग्रस्त लोगों को ही हार्ट अटैक का खतरा (Heart attack risk) अधिक होता था, लेकिन अब देखा गया है कि स्वस्थ व्यक्ति भी अक्सर इन रोगों का शिकार हो जाते हैं। हार्ट अटैक एक जानलेवा रोग है, जो अक्सर आने से पहले कोई संकेत नहीं देता है और इसलिए इससे निपटना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। हालांकि, अब चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि एक नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोज निकाला है, जिसकी मदद से 3 साल पहले ही हार्ट अटैक के खतरे का पता लगाया जा सकता है। वैसे तो हार्ट अटैक जैसे गंभीर हृदय रोगों से निपटने के लिए मेडिकल साइंस ने काफी तरक्की की है। लेकिन, कई बार डॉक्टर इस रोग का पहले ही अंदाजा लगाने में असफल हो जाते थे और ऐसे में इस नई तकनीक से काफी मदद मिल सकती है। इस नई खोज की मदद से लाखों लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकती है और साथ ही समय पर समस्या से निपटने में भी काफी मदद मिल सकती है।
दरअसल, वैज्ञानिकों ने उन लोगों का सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट किया, जो शरीर में होने वाली सूजन व लालिमा को बताता है। सी-रिएक्टिव प्रोटीन शरीर में पाया जाने वाला एक खास प्रोटीन है, जो हृदय में क्षति होने पर रक्त में स्रावित होने लगता है। NHS की रिपोर्ट के अनुसार करीब ढाई लाख रोगियों का सीआरपी लेवल बढ़ा हुआ मिला और साथ ही उनका ट्रोपोनिन भी पॉजिटिव पाया गया। इन लोगों की 3 साल में मृत्यु होने की संभावना लगभग 35 प्रतिशत थी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस टेस्ट की मदद से मरीज की समय पर मॉनिटरिंग की जा सकती है और एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं की मदद से पहले ही समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के डॉ. रमजी खमीज का कहना है कि खोज ऐसे समय हुई है, जब अन्य लोगों से ज्यादा कमजोर लोगों में इसके खतरे की पहचान की जा रही है। इस स्टडी पर फंडिंग ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने की है और उसके प्रोफेसर जेम्स लीपर का कहना है कि यह डॉक्टर्स की मेडिकल किट में शामिल होने वा
ला एक बेशकीमती टूल है।