
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : October 10, 2018 9:52 PM IST
आप को जब भी डिप्रेशन के कोई लक्षण दिखें या घर के किसी सदस्य में ऐसे लक्षण दिखें तो बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर से अपना चेकअप करवाएं। © Shutterstock
डिप्रेशन के मरीजों की संख्या हमारे देश में लगातार बढ़ रही है। यह समस्या किसी उम्र विशेष से जुड़ी हुई नहीं है। वैसे तो डिप्रेशन की सही वजह का पता लगाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह आपकी फैमिली हिस्ट्री पर निर्भर करता है। जी हां, डिप्रेशन दो तरह के होते हैं पहला, जो आनुवांशिक कारणों की वजह से होता है और दूसरा कारण स्ट्रेस या टेंशन की वजह से दिमाग में होने वाले कुछ हार्मोनल बदलाव हैं जो आगे चलकर अवसाद या डिप्रेशन की गंभीर समस्या का रुप ले लेते हैं।
जब आनुवांशिक कारणों से होता है डिप्रेशन- जिन लोगों के परिवार में पहले से ही कोई डिप्रेशन का मरीज रह चुका है उनमें सेरोटोनिन लेवल सामान्य से कम होता है। सेरोटोनिन दिमाग में स्थित एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो आपके मूड को निर्धारित करता है। इसमें कमी होने से आप थका हुआ महसूस करने लगते हैं और किसी काम में मन न लगना, फैसले लेने में परेशानी और किसी काम में फोकस न कर पाना इसके मुख्य लक्षण हैं। डिप्रेशन इन सब लक्षणों का ही मिला जुला स्वरुप है।
विभिन्न रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई है कि जिन लोगों की फैमिली में पहले से ही डिप्रेशन के मरीज होते हैं उनके दिमाग का साइज़ आम लोगों की तुलना में थोड़ा-सा छोटा होता है। इनके दिमाग में लिम्बिक एरिया भी छोटा होता है जो कि आपको इमोशनली खुश रखने के लिए ज़िम्मेदार होता है। लिम्बिक सिस्टम एमीग्डला, हिप्पोकैंपस, थैलेमास, हाइपोथैलेमस, बेसल गंगिला और सिंगूलेट जायरस इन सबसे मिलकर बना होता है और इन सबके अपने अपने कुछ ख़ास रोल होते हैं।
ऐसे लोग जो अनुवांशिक कारणों से डिप्रेशन के शिकार हुए हैं उनके इलाज में ज्यादा समय लगता है और उनकी ज्यादा केयर करनी पड़ती है। कई बार कुछ मरीजों का इलाज पूरी जिंदगी चलता रहता है। वहीं तनाव या किसी बड़े दुख की वजह से जिन लोगों को डिप्रेशन की समस्या होती है उन्हें थेरेपी की मदद से ठीक किया जाता है। समय बीतने के साथ साथ आपकी स्थिति बेहतर होती जाती है और दिमाग में होने वाले केमिकल बदलाव ठीक हो जाते हैं। दोनों ही स्थितियों में ट्रीटमेंट में लगने वाला टाइम उस मरीज पर ही निर्भर करता है। आप को जब भी डिप्रेशन के कोई लक्षण दिखें या घर के किसी सदस्य में ऐसे लक्षण दिखें तो बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर से अपना चेकअप करवाएं।