इन वजहों से हो सकता है छाती में दर्द, चालीस के बाद न करें लापरवाही

छाती का दर्द कई बीमारियाेें के देता है संकेत,हो जाएं सावधान।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 5, 2018 6:06 PM IST

बढ़ते जा रहे प्रदूषण और अनहेल्‍दी लाइफ स्‍टाइल से कई तरह की समस्‍याएं पैदा हो रही हैं। कई बार यह दर्द इतना ज्‍यादा बढ़ जाता है कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। चालीस की उम्र के बाद इस दर्द को और भी गंभीरता से लेना चाहिए। छाती का दर्द कई बीमारियों का संकेत हो सकता है।  जानें क्‍या हो सकती है छाती के दर्द की संभावित वजह।

 छोटे बच्‍चों को हो सकती है ये समस्‍या

छोटे बच्चों में जन्मजात हृदय रोग भी छाती में दर्द पैदा कर सकता है। इस बीमारी के कई प्रकार हैं जिनमें से कुछ में तो बच्चे को दमा जैसे दौरे भी पड़ते हैं। बच्चे की सांस फूल जाती है और उसका शरीर नीला पड़ जाता है।

दिल में हो सकती है समस्‍या

हृदय के भीतर के खानों के एक-दूसरे से जोड़ने वाले वाल्फ-विकार के कारण भी सीने में दर्द पैदा हो सकता है। हृदय की बनावट को देखा जाय तो उसके ऊपर त्वचा का आवरण दिखाई देता है जिसके भीतर दिल धड़कता रहता है। अगर इसमें संक्रमण पैदा हो जाये या उसमें स्राव जमा हो जाये तो न केवल सीने में दर्द ही उठता है, बल्कि सांस लेने या निगलने में भी परेशानी हो सकती है। भारत में हृदय दर्द का प्रमुख कारण संक्रमण ही है जो अधिकतर क्षय रोग से फैलकर हृदय तक जा पहुंचता है। हृदय मज्जा तंतुओं से बना है, जिसमें विकार, संक्रमण या शिथिलता होने से सीने में दर्द तो बढ़ता ही है साथ ही थकान सांस लेने में कठिनाई, चक्कर आना जैसे लक्षण भी पैदा होने लगते हैं। रक्ताल्पता एवं

खून की कमी भी है वजह

अनीमिया की बीमारी भी चेहरे पर पीलापन, थकान एवं कमजोरी पैदा करने के अलावा सीने में दर्द पैदा करती है मगर उपरोक्त सभी कारणों में अधिक आम एवं महत्वपूर्ण वजह है हृदय की रक्तापूर्ति में कमी होना या रक्त की पूर्ति न होगा। रक्तापूर्ति में कमी होना इस बात का द्योतक होता है कि हृदय की मज्जा प्रणाली को आवश्यक मात्रा में रक्तापूर्ति करने वाली धमनियों में या तो रूकावट आ गयी है या उनकी दीवारों में सिकुड़न पैदा हो गयी है।

यह भी हो सकता है कारण

रक्तापूर्ति में आंशिक या अस्थायी कमी की वजह से पैदा होने वाले विकार को 'एंजाइना-पेक्टोरिया' कहा जाता है। 'एंजाइना-पेक्टोरिया' के होते ही छाती में जकड़न जैसे दर्द होने लगता है। यह दर्द कभी-कभी कंधे या बाजुओं तक फैल जाता है। हवा के दबाव के विपरीत चलते वक्त, चढ़ाई चढ़ते वक्त, ठंड के दिनों में, भोजन करने के बाद इस दर्द की तीव्रता दिखाई देती है।

हार्ट अटैक का लक्षण

जब हृदय के एक भाग को रक्त की आपूर्ति पूरी तरह से थम जाती है तो ऐसी अवस्था को हृदयाघात या दिल का दौरा कहा जाता है। फेफड़े की झिल्ली में संक्रमण हो जाने से झिल्ली सूज जाती है या उसके भीतर स्राव जमा हो जाता है। झिल्ली की सूजन को 'प्लूरसी' कहा जाता है। ऐसे में छाती में सांस खींचते समय दर्द होता है। सांस फूलना, भूख न लगना, बुखार न उतरना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।

फेफड़ों में हो सकती है समस्‍या

जहां तक फेफड़ों और श्वसन क्रिया के विकारों की वजह से पैदा हुए छाती के दर्द का सवाल है तो इसमें प्रमुख कारण फेफड़ों और श्वास प्रणाली में संक्रमण होना है। फेफड़ों का अत्यधित आम विकार है फेफड़ों के भीतर संक्रमण होकर उस भाग का सख्त हो जाना जिसकी वजह से उस भाग में वायु का आवागमन रूक जाता है और निमोनिया नामक बीमारी हो जाती है। इसमें छाती में दर्द, तेज बुखार, खांसी और बदबूदार कफ निकलना जैसे प्रमुख लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं।

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मौसमी बुखार के कारण

आमतौर पर होने वाली सर्दी या जुकाम में बुखार, नाक से पानी निकलना और खांसी के अलावा गले में दर्द भी होता है। रोग की उन्नत अवस्था में जब संक्रमण बहुत बढ़ जाता है।  तब ऐसे में भोजन निगलने में परेशानी, ज्वर एवं मुंह का पूरी तरह से न खुल पाना जैसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं। इस कारण भी सीने में दर्द उठ जाता है। इसे एक आपात स्थिति माना जाता है।

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पाचन तंत्र की समस्‍या

अम्लता या एसिडिटी, कब्ज, अजीर्ण आदि पेट संबंधी विकारों, रीढ़ के जोड़ों का दर्द, पीठ दर्द, वायरस द्वारा फैलाया जाने वाला सांमण, मासिक की अधिकता या अनियमितता, अनेक आसनों द्वारा संभोग, यौन संक्रमण, गले का दर्द या सूजन आदि अनेक ऐसे कारण होते हैं जिसके कारण सीने में दर्द उत्पन्न हो सकता है।

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चालीस के बाद रहें सावधान

चालीस वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों को सीने के दर्द से सावधान रहना चाहिए। छाती के दर्द को मामूली समझकर किसी दर्द निवारक गोली का स्वयं ही प्रयोग करना जान लेवा हो सकता है। किसी भी कुशल हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलकर उसका निदान एवं चिकित्सा अतिशीघ्र करवा लेना चाहिए। प्रात: काल टहलना, खान-पान पर नियंत्रण रखना छाती के दर्द से निजात दिलाने का प्रथम फार्मूला है।

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