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विश्व के कई देशों में कोरोना की तीसरी वैक्सीन यानि कि बूस्टर डोज लगनी शुरू हो चुकी है। खबर है कि भारत में भी जल्द बूस्टर डोज लगाई जा सकती है। इस विषय पर आगामी सप्ताह में विशेषज्ञों की एक बड़ी बैठक होगी जिसमें निर्णय लिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक अगर बूस्टर डोज को अप्रूल मिला तो पहले ये कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को लगाई जाएगी। जिसमें बुजुर्ग और किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा अगर बूस्टर डोज को अप्रूल मिलता है तो इसके लिए क्या योग्यता होगी और किस आधार पर ये डोज लगेगा इसे लेकर सरकार की ओर से पूरा ब्यौरा जारी किया जाएगा।
जॉन्स हॉपकिन्स मेडिकल इंस्टीट्यूट के अनुसार, बूस्टर डोज वैक्सीन की वो डोज होती है जो मुख्य वैक्सीन के बाद दी जाती है। आमतौर पर, प्रारंभिक खुराक से जब इम्युनिटी अपने आप कम होने लगती है उस स्थिति में बूस्टर डोजकी जरूरत पड़ती है। यानि कि अगर कोई व्यक्ति किसी बीमारी या संक्रमण से जूझ रहा है और वैक्सीन देने के बाद भी डॉक्टरों को वायरस के शरीर में रहने पर शक है तो इस स्थिति में बूस्टर डोज दी जाती है। बूस्टर डोज देने का मकसद व्यक्ति की इम्युनिटी को लंबे समय पर बनाए रखना है। हालांकि यह समझने की जरूरत है कि बूस्टर डोज एक अलग/अतिरिक्त वैक्सीन के समान नहीं है।
बूस्टर डोज तब दी जाती है जब किसी व्यक्ति ने बीमारी के खिलाफ लगने वाली वैक्सीन की श्रृंखला को तो पूरा कर लिया हो लेकिन बीमारी या संक्रमण के खिलाफ बचाव का ग्राफ धीरे धीरे कम हो रहा हो या वायरस से सुरक्षा समय के साथ कम हो गई हो। इस स्थिति में बूस्टर डोज दी जाती है। जबकि वैक्सीन की अतिरिक्त डोज (Additional Dose of Vaccine) तब दी जाती है जब व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो रही हो। इसमें मध्यम से लेकर गंभीर हर मरीज आ जाता है। यह अतिरिक्त डोज पहले लग चुकी वैक्सीन की प्रतिक्रिया में सुधार करती है।