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पतली कार्निया से आंखों की बीमारियों का ख़तरा बढ़ता है!

कुछ विशेष प्रकार की जीन के जटिल मिश्रण व बदलाव के साथ ही साथ पर्यावरण संबंधी स्थितियां ग्लूकोमा के लिए ज़िम्मेदार होती हैं।

पतली कार्निया से आंखों की बीमारियों का ख़तरा बढ़ता है!

Written by Agencies |Published : January 30, 2018 2:56 PM IST

कार्निया की मोटाई को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार एक प्रोटीन की वजह से एक प्रकार के नेत्र रोग का खतरा पैदा हो सकता है। ग्लूकोमा (मोतियाबिंदु) में नेत्र रोगों के कई विकार शामिल होते हैं, जो आंख पर दबाव बढ़ाता है और आंख से जुड़ी नसों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे आगे चलकर आपको आंखों की रोशनी खत्म हो सकता ही या पीड़ित व्यक्ति अंधा बन सकता है।

इस शोध को चूहों पर किया गया है। इसमें पाया गया कि चूहों के जीन के आनुवांशिक विभिन्नता में जो प्रोटीन पीओयू6एफ2 के लिए कोड करता है, वह आंख की संरचना पर असर डाल सकता है और व्यक्ति में ग्लूकोमा का खतरा बढ़ा सकता है।

शोधकर्ताओं ने जब पीओयू6एफ2 के वाहक जीन को हटा दिया तो प्रभावित चूहों में सामान्य चूहों के मुकाबले कार्निया पतली पाई गई।

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शोधकर्ताओं ने पाया है कि  कुछ विशेष प्रकार की जीन के जटिल मिश्रण व बदलाव के साथ ही साथ पर्यावरण संबंधी स्थितियां ग्लूकोमा के लिए ज़िम्मेदार होती हैं। यह पतली कार्निया का सबसे आम जोखिम कारक है।

अमेरिका के अटलांटा के इमोरी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एल्डान ई. गेईसर्ट ने कहा, "हमें उम्मीद है कि मध्य कार्निया की मोटाई व मोतियाबिंद के बीच संबंध को परिभाषित करने से हमें ग्लूकोमा के जल्दी पहचान में सहायता मिलेगी और इससे बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकेगा।"

इसीलिए अगर आपको अपनी आंखों में किसी तरह का बदलाव या परेशानी महसूस हो तो उसे नज़रअंदाज़ ना करें। इसी तरह नज़र में गड़बड़ी से पीड़ित लोगों को अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए ताकि सही स्थितियों का पता लगाया जा सके और समय पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

स्रोत:IANS Hindi.

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चित्रस्रोत:Shutterstock

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