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सभी को अपने बच्चे बहुत प्यारे होते हैं, फिर चाहें वह इंसान हों या पशु-पक्षी। चिडि़या के अपने बच्चों को दाना खिलाने का अंदाज तो सचमुच में बहुत अद्भुत है। इसी तरह बंदर और कंगारू भी अपने बच्चों को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं। कंगारू अपने बच्चों को एक विशेष अंदाज में अपने तन से चिपका कर रखते हैं। उनकी इसी आदत से विकास हुआ है कंगारू तकनीक का। जो प्रीमेच्योर बेबी के लिए किसी वरदान से कम नहीं।
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क्या है कंगारू मदर केयर
'कंगारू मदर केयर' तकनीक को इसके नाम से ही समझा जा सकता है। जैसे कि कंगारु बच्चे को अपने शरीर के अंग से चिपकाकर रखता है। इसी क्रिया से 'कंगारू मदर केयर' तकनीक का जन्म हुआ। कई बार कुछ बच्चों का जन्म उम्मीद के समय से पहले ही हो जाता है। ऐसे में इन प्री मेच्योर शिशुओं का वजन बहुत कम होता है और स्वास्थ्य की समस्या इन शिशुओं से अधिक होती है। ऐसे समय बच्चों की देखभाल के लिए 'कंगारु मदर केयर' देने की सलाह डॉक्टर देते हैं।
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बच्चों को पालने की बहुत सी तकनीक हम जानवरों से भी सीख सकते हैं। © Shutterstock[/caption]
प्रीमेच्योर बेबी के लिए है जरूरी
इस तकनीक में शिशु के पैरेंट्स अपने नवजात बच्चे को कुछ समय के लिए अपने अंग से चिपकाकर रखते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कंगारू अपने शिशु को अपने करीब रखता है और अपने बच्चे को गर्माहट देता है। ऐसा करने से बच्चे की कई तकलीफें स्वत: ही दूर हो जाती हैं। यह भी पढ़ें - शोध ने भी माना, बेटे मां पर ही जाते हैं, ऐसे निपटें किशोरावस्था की समस्याओं से
इन बातों का रखें ध्यान
'कंगारू मदर केयर' देते समय बच्चे को केवल डाइपर ही पहनाया जाता है और मां को भी ऐसा कुछ पहनाया जाता है जो आगे की तरफ से खुला हो, जिससे कि बेबी का पूरा शरीर मम्मा के करीब रह सके। ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान भी नवजात को मां की छाती से चिपकाया जाता है। ऐसा करने से मां के सीने की गति और सांसों से बच्चे को गर्माहट मिलती है, जिससे कि बच्चे की कई समस्याएं खुद ही हल हो जाती हैं।
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यह हो सकती है अवधि
'कंगारू मदर केयर' बच्चे के पैदा होने के तुरंत बाद से लेकर कई दिनों तक दे सकते हैं। नवजात बच्चों को तो दिन में कई बार 'कंगारू' तकनीक से देखभाल की जरूरत होती है। माता-पिता के दिल की धड़कन सुनने से बच्चे को आराम महसूस होता, उसकी हृदय गति सामान्य हो जाती है और उसे नींद भी अच्छी आती है।