
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : April 27, 2024 7:31 AM IST
Risk of chronic metabolic diseases in India:भारत में डायबिटीज की बीमारी इतनी तेजी से बढ़ी है कि भारत को डायबिटीज का गढ़ कहा जाने लगा है। लेकिन, केवल डायबिटीज ही नहीं अन्य कई मेटाबॉलिक बीमारियों का रिस्क भी भारत के लोगों के सिर मंडरा रहा है। एक नयी स्टडी में यह पता चला कि भारत में नॉन-कम्युनिकेबल डिजिजेज यानि गैर-संक्रामक बीमारियों के मामले आनेवाले समय में बहुत अधिक बढ़ सकते हैं।
आईसीएमआर ( Indian Council of Medical Research) के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा की गयी इस स्टडी में यह पता चला है कि भारत के कई राज्यों में नॉन-कम्युनिकेबल मेटाबॉलिक डिजिजेज (non-communicable metabolic diseases) का खतरा बढ़ रहा है। इस स्टडी को लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी (The Lancet Diabetes & Endocrinology) में प्रकाशित किया गया।
इस स्टडी में बताया गया कि भारत में जिन बीमारियोंके मामले सबसे तेज गति से बढ़ रहे हैं उनमें डायबिटीज के अलावा ये बीमारियां शामिल हैं-
शोधकर्ताओं के अनुसार, भारत और पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में ये मेटाबॉलिक डिसॉर्डर्स बहुत तेजी से फैल रही हैं औऱ लोगों को अपनी चपेट में रही हैं। पिछली कई स्टडीज में भी यह बताया गया कि भारत में डायबिटीज,उच्च रक्तचाप और डिसलिपिडेमिया के मरीजों का बोझ बहुत अधिक है।
आईसीएम की इस स्टडी में भारत में नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों के खतरे को समझने के लिए 28 राज्यों, 2 केंद्रशासित प्रदेशों और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सर्वे किया गया। स्टडी में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 1 लाख और 13 हजार लोगों को शामिल किया गया। इन सभी की उम्र 20 वर्ष से अधिक थी और साल 2008 से साल 2020 तक की अवधि में यह सर्वे किया गया।
स्टडी में पाया गया कि भारत में 11.4% लोगों में डायबिटीज का खतरा (prevalence of diabetes was estimated to be in India) है।