इन दिनों बढ़ गई है एलर्जी के मरीजों की तादाद, जानें कारण और उपाय
विशेषज्ञों की मानें तो सर्दी के महीनों में एलर्जी जनित खांसी अधिक होती है, जब तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषक और एलर्जी कारक तत्व वायुमंडल से हट नहीं पाते हैं, जिससे अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस और अन्य एलर्जी विकार बढ़ जाते हैं।
अलग-अलग अस्तपतालों से आ रही खबर के मुताबिक इन दिनों एलर्जी के मरीजों की तादाद बढ़ गई है। सूखी खांसी, आंख और स्किन की एलर्जी के इन मरीजों में अधिकांश के लक्षण एक से हैं। विशेषज्ञ से वातावरण जनित कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वे कारण जिनसे अचानक बढ़ गई है इस तरह के मरीजों की संख्या।
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विशेषज्ञों की मानें तो सर्दी के महीनों में एलर्जी जनित खांसी अधिक होती है, जब तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषक और एलर्जी कारक तत्व वायुमंडल से हट नहीं पाते हैं, जिससे अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस और अन्य एलर्जी विकार बढ़ जाते हैं। तापमान और ठंड में अचानक परिवर्तन के चलते, शुष्क हवा भी वायुमार्ग को संकुचित करती है, जिससे खांसी और भी ज्यादा परेशान करने लगती है।
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महानगरों में है ज्यादा समस्या
दिल्ली जैसे शहरों में आबादी का अधिकांश हिस्सा ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी प्रदूषक गैसों के कारण एलर्जी जनित खांसी से परेशान हो रहा है। साथ ही इसके कारण आंखों में जलन, सूजन और त्वचा पर भी तमाम तरह की समस्याएं महसूस हो रही हैं। इसके लिए जिम्मेदार अन्य कारकों में सड़क और निमार्ण स्थलों से उठने वाली धूल, पराग कण, धुआं, नमी, और तापमान में अचानक परिवर्तन शामिल हैं। गले में जलन और खुजली हफ्तों से महीनों तक बनी रह सकती है और यह तीव्रता में भिन्न हो सकती है।
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ये हो सकते हैं एनवायरमेंटल एलर्जी के लक्षण
नाक बहना, छींकना, आंखों में पानी और खुजली तथा आंखों के नीचे काले घेरे शामिल हैं। ये काले घेरे या एलर्जिक शाइनर्स नाक की गुहाओं में सूजे हुए ऊतकों और आंखों के नीचे रक्त के जमाव के कारण होते हैं। एलर्जी जनित खांसी आमतौर पर रात में तीव्र हो जाती है।
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वायरल और बैक्टीरियल दोनों तरह के संक्रमण, अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों जैसे फेफड़े या गुर्दे की बीमारी, दिल की विफलता, फेफड़े की पुरानी प्रतिरोधी बीमारी या अस्थमा वाले लोगों में जटिलताओं का कारण बन सकते हैं। अगर तेज बुखार दो दिन से अधिक समय तक बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
कर सकते हैं ये उपाय
- जिन इलाकों में आसपास निर्माण कार्य चल रहा है, उन लोगों को ज्यादा सचेत रहने की जरूतर है। बेहतर है कि आंखों और स्किन को बाहर निकलने से पहले कवर कर लें।
- अपने हाथों को बार-बार धोएं, खासकर तब जब आप किसी सार्वजनिक स्थान पर हों। हमेशा अपनी शर्ट की बांह में या टिश्यू पेपर में छींकें। इससे संक्रामक रोग को फैलने से रोका जा सकता है।
- अपने शारीरिक सिस्टम में कीटाणुओं के प्रवेश को रोकने के लिए अपने चेहरे, खासकर अपनी आंखों और मुंह को छूने से बचें।
- गुड़, अदरक, तुलसी जैसी घरेलू औषधियां अपने रूटीन में शामिल करें।
- समस्या ज्यादा होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।