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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 29, 2022 12:50 PM IST
साइंटिस्ट ने ढूंढी हार्ट अटैक की 3 मुख्य वजह, हर दूसरा मरीज इन 3 परेशानियों का है इस वक्त शिकार
अक्सर लोगों में हार्ट अटैक के लक्षणों को कुछ हद तक सीमित कर दिया जाता है लेकिन एक नई स्टडी में ये खुलासा हुआ है कि डायबिटीज पर खराब कंट्रोल, गतिहीन जीवनशैली और जरूरत से ज्यादा वजन भी इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल है। इंडियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च में कहा गया है कि इन जोखिम कारकों को नियंत्रित करना बहुत ही जरूरी है क्योंकि ये प्रमुख जोखिम कारक हैं। भारतीय आबादी में जोखिम कारकों की समस्याओं को हल करने पर प्रकाशित इस अध्ययन में ये कहा गया है कि एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम में मेटाबॉलिक रिस्क फैक्टर्स भी अहम भूमिका निभाते हैं।
हैदराबाद के KIMS hospital के प्रमुख कार्डियोलॉजिस्ट और अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. बी हाइग्रिव राव ने देशभर के शोधकर्ताओं की एक टीम के साथ मिलकर इस अध्ययन को किया। इस स्टडी में नई दिल्ली से तिरुवनंतपुरम के 15 बड़े कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल शामिल थे।
2 साल की अवधि के दौरान 2153 मरीजों को इस अध्ययन में शामिल किया गया और उनकी तुलना 1200 लोगों से की गई। इन मरीजों को उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर बांट दिया गया। ये मरीज अलग-अलग ग्रामीण और शहरी आबादी से आते थे।
इस स्टडी में शामिल मरीजों की औसत उम्र 56 साल थी और इनमें से 76 फीसदी पुरुष थे। इस स्टडी में ये सामने आया है कि पिछले 20 वर्षों में स्वास्थ्य देखभाल के बावजूद युवा आबादी हार्ट अटैकसे पीड़ित है।
स्टडी में शामिल करीब 66 फीसदी पुरुषों और 56 फीसदी महिलाओं को 60 साल से कम उम्र में हार्ट अटैक हुआ। स्टडी में शामिल एक तिहाईन पुरुष और एक चौथाई महिलाओं को 50 से कम की उम्र में हार्ट अटैक हुआ वहीं 10 फीसदी को 40 से कम की उम्र में हार्ट अटैक हुआ।
ऐसा माना जाता है कि धूम्रपान, हापरटेंशन, डायबिटीज और हाई एलडीएल कोलेस्ट्रोल, हार्ट अटैक के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। बता दें कि 93 फीसदी मरीजों में ये जोखिम कारक मौजूद थे। अन्य जोखिम कारक भी दिखाई दिए, जिन्हें इतनी ज्यादा महत्वता नहीं दी जाती है। इनमें शामिल है, जरूरत से ज्यादा वजन, डायबिटीज पर खराब कंट्रोल, हाई ट्रिग्लीसेराइड्स, HBA1C और गतिहीन जीवनशैली। ये जोखिम कारक हार्ट अटैक के 95 फीसदी मरीजों में शामिल थे।
ये स्टडी बताती है कि इन जोखिम कारकों को नियंत्रित करना दूसरे जोखिम कारकों की ही तरह जरूरी है।
डॉ. हाईग्रीव राव कहते हैं कि मोटापा, गतिहीन जीवनशैली और डायबिटीज का सही तरीके से उपचार भारत में हार्ट अटैक की रोकथाम में हमारे लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भारत में डॉक्टरों द्वारा जोखिम कारकों की पहचान करने की प्रैक्टिस तब तक पूरी नहीं होगी जब तक बड़े पैमाने पर इन कारकों को गंभीरता से हल नहीं किया जाता है।
एक व्यक्ति को अपने स्तर पर एक हेल्दी डाइट लेनी चाहिए और नियमित रूप से एक्सरसाइज करनी चाहिए ताकि वजन को कंट्रोल रखा जा सके। इसके अलावा उन्हें लिपिड प्रोफाइल टेस्ट और डायबिटीज की जांच कराते रहना चाहिए। इसके अलावा 20 साल की उम्र से ही रोकथाम के उपायों की शुरुआत कर देनी चाहिए।