
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : September 30, 2020 10:26 AM IST
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अधिक है कोरोना संक्रमण का खतरा, इन नेचुरल तरीकों से रखें खुद को सेफ
क्योंकि कोरोना नामक वायरस से रूबरू हुए लोगों को अब काफी वक्त हो गया है ऐसे में व्यक्ति इससे बचाव के तरीके और इसके साथ डील करना कहीं न कहीं सीख गया है। यह सच है कि जब COVID-19 वायरस शरीर के अंदर जाता है तो यह न सिर्फ श्वसन प्रणाली को बल्कि अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है। ऐसे में यह जरूरी है कि लोगों को इससे बचने के सही तरीकों के बारे में जानकारी हो। एक वेबसाइट के मुताबिक, फोर्टिस नेटवर्क हॉस्पिटल केडॉ एम डी शकील, हेड-इमरजेंसी एंड ट्रॉमा, हीरानंदानी हॉस्पिटल, वाशी का कहना है कि इटली में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि 87.4 प्रतिशत मरीज, जो COVID-19 से उबर चुके थे, कथित तौर पर थकान, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ और अपच संबंधी समस्याओं से ग्रस्त पाए गए। ऐसा अस्पताल से छुट्टी होने के करीब दो महीने बाद देखा गया। ऐसे में डॉक्टर वाशी ने हाल ही में रिकवर हुए कोरोना मरीजों के लिए बचाव के कुछ तरीके बताएं हैं। इन्हें अपनाने से व्यक्ति काफी हद क सुरक्षित रह सकता है। आइए जानते हैं क्या हैं ये तरीके-
1. मरीज में सांस लेने में तकलीफ या खांसी और सांस फूलने जैसे लक्षणों को देखना चाहिए।
2. यदि मरीज के शरीर का तापमान 100F से ऊपर होता है तो तुरंत जांच करनी चाहिए।
3. सुस्ती, उनींदापन और थकान जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
4. मधुमेह रोगियों की रक्त शर्करा की जांच होती रहनी चाहिए। 3 दिन में एक बार कम से कम मरीज की जांच होनी चाहिए।
5. यदि कोई व्यक्ति हाइपरटेंशन का मरीज है तो उसे अपने उच्च रक्तचाप को चेक करते रहना चाहिए। यदि आपके ब्लड प्रेशर में बार बार उतार चढ़ाव आ रहा है तो आप 2-3 दिन में एक बार भी चेक कर सकते हैं।
6. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के सात दिनों के भीतर डॉक्टर से परामर्श लें।
7. यदि किसी चिकित्सक द्वारापहले सीबीसी, सीआरपी जैसे ब्लड टेस्ट करने की सलाह दी जाए तो इसे जरूर करा लें।
8. फेफड़ों की रिकवरी पोस्ट-इन्फेक्शन की सीमा को देखने के लिए तीन महीने के बाद छाती का सीटी स्कैन दोहराएं।
9. समय समय पर ऑक्सीजन लेवल की जांच कराते रहें।
10. खानपान में किसी तरह की लापरवाही न बरतें।
1. रोगी साइटोकिन स्टार्म में जा सकता है। ऐसी स्थिति में इम्युन सेल्स में हलचल हो जाती है और फेफड़ों पर हमला करती हैं, जिनकी उन्हें वास्तव में रक्षा करनी चाहिए।
2. रक्त वाहिकाएं लीक हो सकती हैं या रक्त का थक्का बनना शुरू हो सकता है।
3. रक्तचाप कम हो सकता है और अंग फेल हो सकते हैं।