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रुबेला, जिसे जर्मन मीजल्स भी कहा जाता है, एक विषाणुजनित संक्रमण है। इसमें पहले चेहरे पर गुलाबी-लाल चकत्ते उभरते हैं और बाद में ये शरीर में अन्य जगहों पर फैल जाते हैं। यह विषाणु करीब तीन दिन तक अपना असर दिखाता है और इसलिए इसे अक्सर 'तीन दिन का खसरा' भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश: मीसल्स-रूबेला का टीका लगते ही 13 स्कूली छात्रों की हालत बिगड़ी
रुबेला के लक्षण
जितने लोगों को रुबेला होता है, उनमें से करीब आधे लोगों को तो इसके कोई लक्षण महसूस नहीं होते। इसलिए उन्हें शायद पता भी नहीं चलता कि उन्हें रुबेला है। जिन लोगों में लक्षण सामने आते हैं, उनमें निम्नाकित आसार हो सकते हैं -
हल्का बुखार
गर्दन के पीछे लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) में सूजन
सर्दी-जुकाम के लक्षण, जैसे कि बंद नाक या नाक बहना और गले में दर्द
आंखों में दर्द व संक्रमण (कंजक्टिवाइटिस, नेत्र शोथ) यह भी पढ़ें – मुंबई में 38 हजार से ज्यादा लोग एचआईवी संक्रमित
कुछ दिनों बाद, चेहरे और गर्दन पर लाल धब्बेदार चकत्ते उभर सकते हैं और इनमें खुजली भी हो सकती है। इसके बाद ये चकत्ते शरीर में और जगहों पर फैलते हैं। आपको ये चकत्ते शायद एक सप्ताह तक रहेंगे और उसके बाद गायब हो जाते हैं।
अगर, आपको रुबेला होने की जरा भी आशंका हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। क्योंकि रुबेला के अधिकांश लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे होते हैं, इसलिए डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट करवाने के लिए कह सकते हैं। वायरस कल्चर या रक्त जांच से रुबेला होने की पुष्टि हो सकती है।
गर्भावस्था में रुबेला से गर्भस्थ शिशु को नुकसान
रुबेला कुछ हद तक गर्भवती स्त्रियों के लिए इतनी गंभीर बीमारी नहीं है।