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बिना किसी खास लक्षण के भी हो सकता है रूबेला, गर्भस्‍थ शिशु का रखें खास ख्‍याल

इन दिनों रूबेला के खिलाफ देशव्‍यापी अभियान जारी है, भारत में इसे 2020 तक समाप्‍त करने का लक्ष्‍य रखा है, पर गर्भस्‍थ शिशुओं के लिए यह खासा खतरनाक हो सकता है।

बिना किसी खास लक्षण के भी हो सकता है रूबेला, गर्भस्‍थ शिशु का रखें खास ख्‍याल
इन दिनों रूबेला के खिलाफ देशव्‍यापी अभियान जारी है, भारत में इसे 2020 तक समाप्‍त करने का लक्ष्‍य रखा है, पर गर्भस्‍थ शिशुओं के लिए यह खासा खतरनाक हो सकता है।© Shutterstock

Written by Yogita Yadav |Published : November 27, 2018 2:00 PM IST

रुबेला, जिसे जर्मन मीजल्स भी कहा जाता है, एक विषाणुजनित संक्रमण है। इसमें पहले चेहरे पर गुलाबी-लाल चकत्ते उभरते हैं  और बाद में ये शरीर में अन्य जगहों पर फैल जाते हैं। यह विषाणु करीब तीन दिन तक अपना असर दिखाता है और इसलिए इसे अक्सर 'तीन दिन का खसरा' भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश: मीसल्स-रूबेला का टीका लगते ही 13 स्कूली छात्रों की हालत बिगड़ी

रुबेला के लक्षण

जितने लोगों को रुबेला होता है,  उनमें से करीब आधे लोगों को तो इसके कोई लक्षण महसूस नहीं होते। इसलिए उन्हें शायद पता भी नहीं चलता कि उन्हें रुबेला है। जिन लोगों में लक्षण सामने आते हैं,  उनमें निम्नाकित आसार हो सकते हैं -

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कुछ दिनों बाद, चेहरे और गर्दन पर लाल धब्बेदार चकत्ते उभर सकते हैं और इनमें खुजली भी हो सकती है। इसके बाद ये चकत्ते शरीर में और जगहों पर फैलते हैं। आपको ये चकत्ते शायद एक सप्ताह तक रहेंगे और उसके बाद गायब हो जाते हैं।

अगर, आपको रुबेला होने की जरा भी आशंका हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। क्योंकि रुबेला के अधिकांश लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे होते हैं, इसलिए डॉक्टर आपको कुछ टेस्‍ट करवाने के लिए कह सकते हैं। वायरस कल्चर या रक्त जांच से रुबेला होने की पुष्टि हो सकती है।

गर्भावस्था में रुबेला से गर्भस्‍थ शिशु को नुकसान

रुबेला कुछ हद तक गर्भवती स्त्रियों के लिए इतनी गंभीर बीमारी नहीं है।

  •  यह गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदेह हो सकता  है। अगर, गर्भावस्था के शुरुआती 11 हफ्तों में आपको रुबेला हो जाए, तो यह अत्याधिक खतरनाक साबित हो सकता है। दुर्भाग्यवश, इस समय यह गर्भपात का कारण भी बन सकता है।
  • गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में आपको संक्रमण होने का मतलब यह भी है कि आपके शिशु में जन्मजात रुबेला सिंड्रोम (सी.आर.एस.) हो सकता है। सी.आर.एस. की वजह से शिशु में गंभीर विकार पैदा हो सकते हैं। बहरहाल, गर्भावस्था के अंतिम चरण में यह संक्रमण होने पर खतरा काफी कम होता है।
  • गर्भावस्था के शुरुआती 10 हफ्तों में, जिन शिशुओं को यह संक्रमण होता है, दुर्भाग्यवश उनमें से 10 में से नौ को जन्मजात रुबेला सिंड्रोम होता ही है।
  • 11 सप्ताह और 16 सप्ताह के बीच यह जोखिम तेजी से घट जाता है। इस दौरान 10 में से केवल एक या दो शिशुओं में ही सी.आर.एस. होने का खतरा रहता है। उनमें भी काफी कम विसंगतियां होने की संभावना रहती है।
  • 16 और 20 सप्ताह के बीच, सी.आर.एस. होना काफी दुर्लभ है और इसका मुख्य प्रभाव बहरापन ही होता है। 20 सप्ताह के बाद से किसी भी शिशु को सी.आर.एस. होने का कोई मामला सामने नहीं आया है।
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