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Written By: Yogita Yadav | Published : October 25, 2018 2:10 PM IST
हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, बैंगनी आलू सहित रंगीन पौधों में बायोगैक्टिक यौगिकों होते हैं। © Shutterstock
आपने आलूओं का सेवन तो खूब किया होगा, लेकिन क्या आपने पर्पल आलू खाएं हैं। हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, बैंगनी आलू सहित रंगीन पौधों में बायोगैक्टिक यौगिकों होते हैं। जैसे कि एंथोकायनिन और फिनोलिक एसिड जो कि कैंसर के ट्रीटमेंट में मदद करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन यौगिकों का एक मोलेक्युलर लेवल पर काम करना कैंसर रोकथाम की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
कहां मिलतेे हैं ये आलू
जामुनी रंग के आलू का बाहरी छिलका गहरा नीला, लगभग काला होता है। जबकि अंदरूरी हिस्सा गहरा नीला या जामुनी होता है। पकने के बाद भी इनका जामुनी रंग बरकरार रहता है। फ्लैवोनोइड्स के एंथोसाइनिन से भरपूर यह आलू फ्रांस में पाया जाता है। अन्य तरह के आलू की तुलना में इसकी उपज और ग्रोथ कुछ देर से होती है। यह भी पढ़ें – इस मौसम का तोहफा है मेथी, सब्जी हो या सूप जैसे चाहें करें इस्तेमाल
एंटी एजिंग भी है ये
जामुनी रंग के इस आलू में अधिक मात्रा में विटामिन सी और ऑक्सीकरण निरोधक तत्व पाए जाते हैं। यह ऑक्सीकरण निरोधक तत्व बुढ़ापे की प्रक्रिया को रोकते हैं। इस आलू की इन किस्मों को शुरू में टेस्ट ट्यूब में तैयार किया जाता है ताकि इसे बीमारियों से बचाया जा सकें। इसके बाद पौधे को खेतों में लगाया जाता है। देखने में यह आलू चुंकदर की तरह लगता है लेकिन खाने में इसका स्वाद आलू की तरह होता है। सामान्य आलू के मुकाबले इस जामुनी रंग के आलू में अरारोट की मात्रा बहुत कम होती है। इसी वजह के कारण इसका रंग जामुनी होता है।
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क्या कहते हैं शोधकर्ता
कोलन कैंसर के बारे में अमेरिका के पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर जयराम के पी वनामाले का कहना है कि यह बीमारी को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन यह पुरानी बीमारियों को रोकने में भी मदद कर सकता है। इस रेसिपी से घर पर ही बनाएं स्वादिष्ट चाइनीज फ्राइड राइस
कैसे की गई रिसर्च
इस पर एक स्टडी की गई जिसमे सूअरों को उच्च कैलोरी बैंगनी-फ्लेस्ड आलू परोसा गया था। जिसके बाद ये पता चला कि इनमे अन्य सुअरों की तुलना में कम कोलोनिक म्यूकोसॉल इंटरलेकुन -6 (आईएल -6) पाया गया था। वनामाले का कहना है कि आईएनएल -6 एक प्रोटीन है जो सूजन को कम करता है और आईएल -6 का ऊंचा स्तर प्रोटीन से संबंधित है। जैसे की - 67, जो कि कैंसर सेल्स के प्रसार और वृद्धि से जुड़ा हुआ है।
रिसर्च के नतीजे
जर्नल ऑफ़ पोषण बायोकैमिस्ट्री में प्रकाशित निष्कर्ष बताते हैं कि जैविक पोषक तत्वों वाले सभी खाद्य पदार्थ खाने से मनुष्य को बड़ी मात्रा में प्रोटीन इसके अलावा न्यूटेरियंट जैसे विटामिन, कैरोटीनॉइड और फ्लेवोनोइड्स जैसे प्रभावी पदार्थ मिल सकते हैं। वानमाले ने कहा कि इन निष्कर्षों ने हाल ही में किए गए शोध को पक्का किया है। नॉन-वेजिटेरियन फूड के बजाय वेजिटेरियन फूड खाने से कोलन कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। रिसर्च में ये भी पाया गया कि कई वेस्टर्न देशों में अधिक मांस और कम फलों और सब्जियों का सेवन करने से कोलन कैंसर से बहुत मौतें होती हैं। यह भी पढ़ें – फायदेमंद हैं दूध और केला, पर एक साथ न करें सेवन, जानें क्यों
इसलिए बैंगनी आलू है ज्यादा फायदेमंद
शोधकर्ताओं ने इस स्टडी में बैंगनी आलू का इस्तेमाल किया था। फल और सब्जियों का सेवन करने से इसी तरह के रिजल्ट कम देखने को मिलते हैं। वनामाले का कहना है कि व्हाइट आलू में कुछ सहायक यौगिक हो सकते हैं, लेकिन बैंगनी आलू में एंटी-ऑक्सीडेंट यौगिकों की मात्रा अधिक होती है। राधाकृष्णन और पैन स्टेट के लावानिनि रेड्डीवरी सहित शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे एक फायदा ये भी है कि इससे कैंसर उपचार के साथ-साथ कृषि को लाभ होगा। इससे दुनिया भर के छोटे किसानों को मदद मिलेगी। दवाईयों को बढ़ावा देने के बजाय हम फलों और सब्जियों को बढ़ावा दे सकते हैं जो पुरानी बीमारी की बढ़ती समस्या का मुकाबला करने में अधिक प्रभाव दिखाएगी।