
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 11, 2019 9:14 AM IST
इलाज और अन्य मेडिकल सेवाओं की हालात देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत अच्छी नहीं है। इसी स्थिति को बदलने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने मेडिकल स्टुडेंट्स को प्रोत्साहित किया है। महाराष्ट्र सरकार ने स्टुडेंट्स को एक प्रस्ताव दिया है कि वह राज्य के ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवा दें और बदले में उन्हें आरक्षण मिलेगा।
महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि एमबीबीएस की 10 प्रतिशत और मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएशन की 20 प्रतिशत सीटों को उन डॉक्टरों के लिए आरक्षण मिलेगा जो 5 और 7 साल के लिए ग्रामीण क्षेत्र में अपनी सेवा देने के लिए तैयार हैं। हालांकि कोटा सीटों के साथ सख्त नियम भी हैं।
कोर्स खत्म होने के बाद जो लोग राज्य संचालित अस्पतालों में अपनी सेवा नहीं देंगे उन्हें पांच साल की सजा दी जाएगी और यहां तक कि उनकी डिग्री भी रद्द की जा सकती है। सोमवार को राज्य कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया है। अब इसे कानून बनाने के लिए सरकार विधेयक लेकर आएगी। ये आरक्षित सीटें राज्य और सरकार संचालित मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ उन उम्मीदवारों के लिए भी उपलब्ध होंगी जो सरकारी केंद्रों में लंबे समय तक काम करना चाहते हैं।
शुरुआती आंकलन के अनुसार 450-500 एमबीबीएस सीटें इस कोटा के तहत निर्धारित होंगी। वहीं पोस्ट ग्रेजुएशन में इन सीटों की संख्या 300 होगी। चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय के प्रमुख डॉक्टर टी पी लहाणे ने कहा, 'यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और पहाड़ी या दूरस्थ क्षेत्रों में ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं को सुनिश्चित किया जा सके। कोटा के तहत सीट पाने वाले छात्रों को एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने होंगे। किसी भी तरह के उल्लंघन पर पांच साल की जेल के साथ ही डिग्री रद्द करने का प्रावधान होगा।'
चिकित्सा शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ ने कहा कि इसी तरह की अवधारणा सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज, पुणे में भी मौजूद है। महाराष्ट्र के 2018-19 आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में प्रति 1,330 लोगों पर एक डॉक्टर उपलब्ध है जबकि डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के अनुसार प्रति एक हजार व्यक्तियों पर एक डॉक्टर होना चाहिए।