कम हो रहा है युवाओं के दिमाग का विकास, वजह इंटरनेट तो नहीं  

नजदीकी दोस्तों से भी प्रत्यक्ष मिलने की बजाय सोशल मीडिया और वीडियो चैट से कर रहे हैं संपर्क।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 12, 2018 9:39 AM IST

हाल ही में हुए शोध में यह खुलासा हुआ है कि पिछले कुछ वर्षों में युवाओं के दिमाग के विकास की रफ्तार कम हुई है। वे अकेलेपन के आदी हो रहे हैं जबकि इंटरनेट पर उनकी निर्भरता बढ़ती जा रही है। संभवत: इसकी वजह वह अकेलापन है जो वे दुनिया से कटकर इंटरनेट पर बिताते हैं।

बढ़ रहा है अकेलापन

सोशल मीडिया और इंटरनेट की आभासी दुनिया युवाओं को अकेलेपन का शिकार बना रही है। अमेरिका में स्वतंत्र संगठन ‘कॉमन सेंस मीडिया’ के एक सर्वेक्षण ने दिखाया कि 13 से 17 वर्ष के किशोर नजदीकी दोस्तों से भी प्रत्यक्ष मिलने की बजाय सोशल मीडिया और वीडियो चैट के जरिये संपर्क करना पसंद करते हैं।

ऐसे हुआ शोध

इस सर्वेक्षण के लिए 1141 किशोरों को अध्ययन में शामिल किया गया, इनकी उम्र 13 से 17 साल थी। 22 मार्च से 22 अप्रैल के बीच अध्ययन में शामिल बच्चों से प्रश्नावलियां भरवाई गई।

चौंकाने वाले थे किशोरों के जवाब

- 63% किशोर स्नैपचैट का इस्तेमाल करते हैं।

- 61% में इंस्टाग्राम को लेकर जुनून की हद तक चाहत।

- 43% किशोर फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं।

-35% किशोरों को सिर्फ वीडियो संदेश के जरिये मित्रों से मिलना पसंद है।

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-40% किशोरों ने माना, सोशल मीडिया के कारण मित्रों से नहीं मिल पाते।

-66% किशोर संवाद के लिए वीडियो चैट, टेक्स्‍ट मैसेज को तरजीह देते हैं।

-89% किशोरों ने बताया कि उनके पास अपना स्मार्ट फोन है।

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- 81% किशोरों ने कहा कि ऑनलाइन आदान-प्रदान जिंदगी का जरूरी हिस्सा।

- 32% किशोरों ने बताया कि वे फोन व वीडियो कॉल के बिना नहीं रह सकते।

- 54% सिर्फ दूसरों का ध्यान खींचने को सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं।

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सोचने समझने की क्षमता पर भी असर

  • इंटरनेट की लत किशोरों के दिमागी विकास अर्थात सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकती है
  • लगातार आभासी दुनिया में रहने वाले किशोर असल दुनिया से दूर हो जाते हैं। इससे वे निराशा, हताशा और अवसाद के शिकार बन सकते हैं
  • घंटों स्मार्टफोन आदि का इस्तेमाल करने से अनिद्रा की समस्या हो सकती है, जिससे कई शारीरिक और मानसिक बीमारियां पनप सकती हैं
  • ज्यादातर किशोर व बच्चे अभिभावकों से छिपकर इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताते हैं, इसलिए उनमें झूठ बोलने की प्रवृत्ति पैदा हो सकती है।
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