Ban On Firecrackers In Delhi : दिल्ली में 1 जनवरी 2022 तक पटाखों पर बैन, प्रदूषण बढ़ने के डर से लिया गया फैसला

ठंड के मौसम में देश के उत्तरी भाग और खासकर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्मॉग, धुआं और कोहरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। (Ban On Firecrackers In Delhi)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 29, 2021 5:14 PM IST

Ban On Firecrackers In Delhi : राजधानी दिल्ली में इस दिवाली और अन्य त्योहारों पर पटाखे जलाना संभव नहीं होगा क्योंकि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (Delhi Pollution Control Committee ) ने राजधानी में 1 जनवरी, 2022 तक पटाखों की सभी वेरायटीज़ की बिक्री और उन्हें फोड़ने पर पाबंदी लगा दी है। गौरतलब है कि ठंड के मौसम में देश के उत्तरी भाग और खासकर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्मॉग (Smog), धुआं और कोहरा (Fogg) बहुत अधिक बढ़ जाता है। इसी तरह दिवाली के त्योहार के समय होनेवाले प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों पर पाबंदी लगा दी गयी है। (Ban On Firecrackers In Delhi In Hindi)

1 जनवरी 2022 तक लागू रहेगा पटाखों पर बैन

इस आदेश को पारित करते हुए कहा गया कि, एक्सपर्ट्स द्वारा आनेवाले कुछ दिनों में कोविड -19 संक्रमण की दर में बढ़ोतरी का भी अनुमान लगाया गया है। दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान पटाखे जलाने से हवा में प्रदूषण और धुआं बढ़ेगा जिससे फेफड़ों और श्वसन मार्ग को नुकसान पहुंचता है। गौरतलब कि कोरोना संक्रमण कमज़ोर फेफड़ों पर बुरी तरह हमला करता है। इसी तरह पटाखे जलाने के लिए लोग एकसाथ आएंगे जिससे सोशल डिस्टेंसिंग की नियमों का उल्लघंन भी होगा और कोरोना संक्रमण के प्रसार का संभावना बढ़ती है।

पटाखों के धुएं से घुट सकता है दम

पटाखों से निकलने वाले धुएं से आंखों में जलन और स्किन एलर्जी जैसी समस्याएं होती हैं। लेकिन, इस धुएं से स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर भी पड़ता है। श्वसन मार्ग पर पटाखों का धुआं गम्भीर प्रभाव डालता है। इसके अलावा पटाखों के फटने के बाद हवा में प्रदूषण फैलाने वाले कण फैल जाते हैं, जो श्वसन मार्ग में अटक जाते हैं और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।

अस्थमा के मरीजों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

त्योहारों के मौसम में जब आतिशबाज़ियां और पटाखे छोड़े जाते हैं तो इससे अस्थमा के मरीजों को खासतौर पर तकलीफ बढ़ने का डर सताने लगता है। इसीलिए त्योहारों की सीज़न में अस्थमा के मरीजों को अपना खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। पटाखों से निकलनेवाला धुआं अस्थमा पेशेंट्स के श्वसन मार्ग में प्रवेश करता है जिसके बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। विशेषकर ऐसे बुज़ुर्ग जिन्हें अस्थमा की शिकायत है उनके लिए पटाखों से फैलनेवाला प्रदूषण बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है। पटाखों के धुएं के साथ-साथ प्रदूषण कण श्वसन मार्ग को चोक कर देते हैं जिससे, स्वस्थ लोगों को भी अस्थमा की शिकायत हो सकती है वहीं, पहले से अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए स्थिति जानलेवा बन सकती है।

बढ़ता है कैसर का खतरा

गौरतलब है कि पटाखे जलाने के बाद कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फ्यूरिक नाइट्रिक और कार्बनिक एसिड जैसी विषैली गैसों का रिसाव होता है जो हवा के माध्यम से मानव शरीर में पहुंचती हैं। ये गैसेस कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों और कैंसर का खतरा उत्पन्न करती हैं।

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