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कनाडा को भारत के आयुर्वेद में मिला वहां के अस्पतालों में भीड़ कम करने का मंत्र, अपनाई जाएगी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति

कनाडा के ओंटारियो प्रोविंस के मानसिक स्वास्थ्य मंत्री और कनाडा इंडिया फाउंडेशन का अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में भव्य स्वागत किया गया और विशेषज्ञों के साथ आयुर्वेद के प्रसार पर गंभीर चर्चा हुई।

Written by Atul Modi |Published : January 18, 2023 5:20 PM IST

कनाडा के ओंटारियो प्रोविंस के मिनिस्टर ऑफ़ मेन्टल हेल्थ एंड एडिक्शन्स, माइकल टिबोलो को कनाडा के अस्पतालों में भीड़ कम करने का इलाज भारत की आयुर्वेदिक पद्वति में दिखाई देता है। आयुर्वेद को बेहतर तरीके से समझने के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) में आए कैनेडियन प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे माइकल टिबोलो ने कहा कि, आयुर्वेदिक जीवन शैली अपनाने से कई रोगों से बचा जा सकता है और कनाडा में इसके संचार से आने वाले वर्षों में वहां के अस्पतालों में भीड़ कम हो सकती है।

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में आए ओंटारियो के मिनिस्टर ऑफ़ मेन्टल हेल्थ एंड ऐडिक्शन्स माइकल टिबोलो की अगुवाई में कनाडा के एक अंतराष्ट्रीय स्तर प्रतिनिधि मंडल का सोमवार को स्वागत किया गया। कनाडा से आये इस प्रतिनिधिमंडल ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के हॉस्पिटल, शैक्षिक और प्रशासनिक ब्लॉक और प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया और चिकित्सा के क्षेत्र में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के एकीकृत मॉडल को समझा। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के आयुर्वेदिक शोध, सामुदायिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर वहां के स्कॉलर्स और डॉक्टर्स से चर्चा की।

कनाडा के प्रतिनिधिमंडल ने इंटीग्रेटेड चिकित्सा पद्धति की ली जानकारी

मिनिस्टर ने कहा, ''यहां पर आ कर मुझे यह ज्ञान हुआ कि पूरब और पश्चिम की चिकित्सा पद्वतियां एक साथ चल सकती है। यहां कनाडा में हमारा ध्यान त्वरित परिणामों की तरफ ज़्यादा रहता है। हम बचाव स्वास्थ्य को लेकर शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना भूल जाते है। मगर, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में कई डॉक्टर्स और विशेषज्ञों ने मुझे आज अपना बहुमूल्य समय दिया और मुझे आयुर्वेद और बाकी चिकित्सीय पद्वतियों के इंटीग्रेटेड मॉडल की जानकारी दी। आकस्मिक चिकित्सा के क्षेत्र में आयुर्वेदिक औषधियां और पाश्चात्य चिकित्सा कैसे साथ-साथ काम कर सकते हैं, यह अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में देखने को मिलता हैं। आयुर्वेद जैसी हजारों साल पुरानी पारम्परिक चिकित्सा ने रिसर्च द्वारा यह सिद्ध किया है किया है कि इनके सेवन से इमरजेंसी मेडिसिन की जरूरत को टाला या कम किया जा सकता हैं।"

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कनाडा के अस्पतालों में आयुर्वेद के जरिए भीड़ कम करने का होगा प्रयास

कनाडा में ओंटारियो प्रान्त के बारें में बात करते हुए उन्होंने कहा कि ओंटारियो में स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ अस्पतालों तक केंद्रित ना रहे, वह समाज के हर वर्ग के बीच में पहुंचे, यही हमारा प्रयास है। उन्होंने कहा कि मुझे अस्पतालों में मरीज़ों की संख्या को कम करने का तरीका भी आखिरकार भारत के आयुर्वेद के बारें में जानकर मिला है। उन्होंने आगे कहा कि ''अखिल भारतीय आर्युवेद संस्थान ने यह सिद्ध किया है कि योग और आयुर्वेद की शक्ति से कई रोगों से बचाव और उपचार संभव हैं।"

कनाडा में भारत की मदद से खुलेंगे आयुर्वेद संस्थान!

संस्थान की निदेशक प्रोफेसर (डॉ) तनूजा मनोज नेसरी ने कनाडा के प्रतिनिधिमंडल को धन्यवाद देते हुए कहा कि वो दिन दूर नहीं जब कनाडा इंडिया फाउंडेशन की मदद से वहां पर भी आयुर्वेद संस्थान खुलेंगे और आयुर्वेद से जुड़े शिक्षा का प्रचार-प्रसार होगा। हम सहर्ष अपने शोध को कनाडा के माननीय मंत्री के साथ साझा करेंगे ताकि उन्हें वो वहां की सरकार के समक्ष रख सकें।

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