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पारा पहुंच रहा है चालीस के पार, ऐसे में जानें किसे कहते हैं "लू लगना" और इससे बचाव

पारा जब तेजी से चढ़ने लगता है तब शरीर के भीतर से पानी और नमक की कमी होने लगती है, इस स्थिति से तुरंत बचा न जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

पूरे उत्तर भारत में गर्मी का कहर जारी है। तेज धूप और लू के कारण जन जीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं इन दिनों तेज धूप और ताप से होने वाली बीमारियों में भी इजाफा होने लगा है। इनमें भी सबसे ज्या दा मध्य  प्रदेश में लू का कहर देखने में आ रहा है। मध्यै प्रदेश के खरगोन जिले में सबसे ज्या दा पारा 45 डिग्री को भी पार कर गया है। इस मौसम में लू लगने की संभावना सबसे ज्यानदा बढ़ जाती है। पर क्या  आप जानते हैं कि जिसे लू लगना कहा जाता है, वह असल में क्या  बीमारी है और इससे कैसे किया जाए बचाव।

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उत्तरी भारत में गर्मियों में उत्तर-पूर्व तथा पश्चिम से पूरब दिशा में चलने वाली भीषण गर्म तथा शुष्क हवाओं को लू कहतें हैं। इस तरह की हवा मई तथा जून में चलती हैं। पर इन दिनों अप्रैल में ही पारा इतना ज्‍यादा बढ़ गया है कि लू लगने के मामले सामने आने लगे हैं। इन दिनों कुछ जगहों पर तापमान 40 से 45 डिग्री तक भी पहुंच गया है। गर्मियों के इस मौसम में लू चलना आम बात है।

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कैसे लगती है लू

"लू" लगना गर्मी के मौसम की बीमारी है। "लू" लगने का प्रमुख कारण शरीर में नमक और पानी की कमी होना है। पसीने की "शक्ल" में नमक और पानी का बड़ा हिस्सा शरीर से निकलकर खून की गर्मी को बढ़ा देता है। सिर में भारीपन मालूम होने लगता है, नाड़ी की गति बढ़ने लगती है, खून की गति भी तेज हो जाती है। सांस की गति भी ठीक नहीं रहती तथा शरीर में ऐंठन-सी लगती है। बुखार काफी बढ़ जाता है। हाथ और पैरों के तलुओं में जलन-सी होती रहती है। आंखें भी जलती हैं। इससे अचानक बेहोशी व अंततः रोगी की मौत भी हो सकती है।

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[caption id="attachment_662983" align="alignnone" width="655"]heat-stroke-precaution "लू" लगने का प्रमुख कारण शरीर में नमक और पानी की कमी होना है। ©Shutterstock.[/caption]

ये हैं लू से बचने के परंपरागत उपाय

लू से बचने के लिए दोपहर के समय बाहर नहीं निकलना चाहिए। अगर बाहर जाना ही पड़े तो सिर व गर्दन को तौलिए या अंगोछे से ढंक लेना चाहिए। अंगोछा इस तरह बाँधा जाए कि दोनों कान भी पूरी तरह ढँक जाएँ।

गर्मी के दिनों में हल्का व शीघ्र पचने वाला भोजन करना चाहिए। बाहर जाते समय खाली पेट नहीं जाना चाहिए।

गर्मी के दिनों में बार-बार पानी पीते रहना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने । पानी में नींबू व नमक मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीते रहने से लू नहीं लगती।

गर्मी के दौरान नरम, मुलायम, सूती कपड़े पहनना चाहिए जिससे हवा और कपड़े शरीर के पसीने को सोखते रहते हैं।

गर्मी में ठंडाई का सेवन नियमित करना चाहिए। मौसमी फलों का सेवन भी लाभदायक रहता है जैसे, खरबूजा, तरबूज, अंगूर इत्यादि।

गर्मी के दिनों में प्याज का सेवन भी अधिक करना चाहिए एवं बाहर जाते समय कटे प्याज को जेब में रखना चाहिए।

अगर लग जाए लू, तो फौरन करें ये उपाय

लू लगने पर तत्काल मरीज को डॉक्‍टर को दिखाना चाहिए। डॉक्टर को दिखाने के पूर्व कुछ प्राथमिक उपचार करने पर भी लू के रोगी को राहत महसूस होने लगती है।

बुखार तेज होने पर रोगी को ठंडी खुली हवा में आराम करवाना चाहिए।

104 डिग्री से अधिक बुखार होने पर बर्फ की पट्टी सिर पर रखना चाहिए।

रोगी को तुरंत प्याज का रस शहद में मिलाकर देना चाहिए।

प्यास बुझाने के लिए नींबू के रस में मिट्टी के घड़े अथवा सुराही के पानी का सेवन करवाना चाहिए। बर्फ का पानी नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि इससे लाभ के बजाए हानि हो सकती है।

रोगी के शरीर को दिन में चार-पांच बार गीले तौलिए से पोंछना चाहिए।

चाय-कॉफी आदि गर्म पेय का सेवन अत्यंत कम कर देना चाहिए।

आम का पना है लाभदायक

आम का पना लू लगने से बचाने और उपाय के रूप में बहुत फायदेमंद होता है। कच्चे आम को गरम राख पर मंद आंच वाले अंगारे में भूनकर, ठंडा होने पर उसका गूदा निकालकर उसमें पानी मिलाकर मसलना चाहिए। इसमें जीरा, धनिया, शकर, नमक, काली मिर्च डालकर पना बनाना चाहिए। पने को लू के रोगी को थोड़ी-थोड़ी देर में दिया जाना चाहिए। जौ का आटा व पिसा प्याज मिलाकर शरीर पर लेप करें तो लू से तुरंत राहत मिलती है।

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