
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : January 21, 2021 10:32 AM IST
हेल्थ वर्कर की मौत का कारण कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield Vaccine) नहीं बल्कि हेल्थ कॉम्प्लिकेशन बताया जा रहा है।
कोरोना वायरस की वैक्सीन से साइड इफेक्ट्स (Side Effects Of The Coronavirus (COVID-19) Vaccine) होने संबंधी कई मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें से कुछ मामलों में गंभीर रिएक्शन हुआ है तो कुछ में मामूली है। तेलांगना (Telangana News) में भी एक 42 वर्षीय हेल्थ वर्कर की कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield Vaccine) लेने के अगले दिन मौत होने का मामला सामने आया है। हेल्थ केयर वर्कर को निर्मल जिले (Nirmal district) के कुंतला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (Kuntala Primary Health Centre) में मंलवार को कोविशिल्ड दिया गया था। जिसके अगले दिन यानि कि बुधवार की सुबह छाती में दर्द (Chest Pain) होने के कारण उसकी मौत हो गई है। तेलांगना सरकार का कहना है कि शुरुआती जांच से पता चल रहा है कि हेल्थ केयर वर्कर की मौत और वैक्सीन में कोई संबंध नहीं है। हालांकि मामले की गंभीर जांच चल रही है।
कुंतला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डायरेक्टर, जी श्रीनिवास राव का कहना है "हेल्थ केयर वर्कर जिसका नाम वितल राव था, वह ‘108’ एंबुलेंस में ड्राइवर थे। उन्हें मंगलवार की सुबह 11.30 बजे 79 और लोगों के साथ कोविशील्ड वैक्सीन दी गई थी। वितल राव के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति में वैक्सीन के मामूली लक्षण तक भी नहीं दिखे हैं। लेकिन हेल्थ केयर वर्कर, वितल ने 20 जनवरी की सुबह 2.30 बजे छाती में दर्द (Chest Pain) होने की बात कही थी। इसके 3 घंटे बाद ही 5.30 बजे उस व्यक्ति की मौत हो गई। शुरुआती जांच में पता चल रहा है कि व्यक्ति की मौत और वैक्सीन के बीच कोई संबंध नहीं है। दिशा-निर्देशों के अनुसार, डॉक्टरों की एक टीम द्वारा पोस्टमार्टम किया जाएगा। जिला AEFI समिति मामले की जांच कर रही है और अपनी रिपोर्ट राज्य AEFI समिति को सौंपेगी। डॉ श्रीनिवास राव ने कहा कि इस रिपोर्ट को वे केंद्रीय AEFI समिति को भी सौपेंगे। बता दें कि तेलांगना में ऐसा पहला केस सामने आया है।
केंद्रिय हेल्थ मिनिस्ट्री का कहना है कि पोस्टमार्टम चल रहा है। कोरोना वैक्सीन अभियान के पांचवे दिन शात 6 बजे तक करीब 82 मामले ऐसे दर्ज जिनमें कुछ न कुछ साइड इफेक्ट दिखा है। मंत्रालय का कहना है कि अभी तक कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है।