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Written By: Editorial Team | Updated : May 2, 2014 3:15 PM IST
हालांकि आपके शरीर में हर तरह के तनाव को ख़त्म करने या उससे लड़ने की ताकत होती है पर स्थायी/दीर्घकालिक
तनावों से निजात दिलवाने में ये उतना कारगर नहीं होता। हम सब अपने व्यस्त जीवनशैली के कारण तनावों से घिर जाते हैं। बावजूद इसके, हममें से कम ही इन तनावों की मौजूदगी को समझ या स्वीकार कर पाते हैं। दीर्घकालिक तनाव तब शुरू होते हैं जब हम किसी भी तरह के तनाव की मौजूदगी को मानने के लिए तैयार नहीं होते। कुछ लोगों पर उनका मस्तिष्क इस कदर हावी होता है कि वो खुद के तनावपूर्ण होने की बात को ही झुठला देते हैं। और कुछ लोग इन तनावों को सबसे छुपा सकने यहाँ तक कि खुद से भी छुपा सकने में कामयाब होते हैं। बजाय इसके कि आप सबसे ये कह रहे हों कि मैं तो बिलकुल ठीक हूँ, आपका ध्यान तनाव के लक्षणों को पहचानकर उन्हें दूर करने में होना चाहिए क्योंकि आगे चलकर ये आपके स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है।1. वज़न बढ़ना: जी हाँ! यदि आप चाहते हैं कि आपका वज़न न बढे तो तनाव मुक्त जीवन जीना शुरू कीजिए। चाहें आप दुबले हों या मोटे, स्ट्रेस हारमोन की बढ़ती मात्रा चर्बी जमा करने में सहायक होती है। साथ ही कुछ लोग तानापूर्ण स्थितियों में सामान्य से ज़्यादा खाने के आदी होते हैं, ऐसे हालात में कैलोरी बर्न करने के बजाय वे अनजाने में बहुत ज़्यादा कैलोरी जमा कर लेते हैं।2. मांसपेशी तनाव: तनाव के दौरान जो हारमोन छोड़े जाते हैं वे न सिर्फ आपका रक्तचाप और ह्रदय स्पंदन गति बढ़ाते हैं बल्कि आपकी मांसपेशियों को भी सख्त कर देते हैं। अगर आप तनाव में हुए तो ऑफिस में गलत मुद्रा में बैठकर काम करना मांसपेशियों में दर्द को और बढ़ा सकता है। (पढ़ें: कोलेस्ट्रोल पर कसें लगाम– रहें ह्रदय रोगों से दूर) । 3. पेट दर्द: पेट में चुभन महसूस होना सिर्फ रोमांचित होने या नर्वस होने का लक्षण नहीं है; बल्कि यह तनाव की निशानी भी है। अध्ययनों ने पेट और मस्तिष्क के बीच बेहद नज़दीकी सम्बन्ध बताया है। हावर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अगर आप गैस संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज़ या एसिडिटी आदि से जूझ रहे हैं तो तनावपूर्ण होने की स्थिति में आपकी यह समस्याएँ और गंभीर हो सकती हैं। 4. बाल झड़ना: दीर्घकालिक तनाव से सेक्स हारमोन भी रिलीज़ होते हैं। ये हारमोन अस्थायी रूप से आपके बाल पर भी असर दाल सकते हैं। किसी दीर्घकालिक तनावपूर्ण घटना के बाद यह असर तीन से छः महीने तक रह सकता है। 5. भूलने की प्रवृत्ति: यदि आप वैसे काम करना भूल रहे हैं जिन्हें आम तौर पर आप नहीं भूलते, तो मान लीजिए कि आप तनावग्रस्त हैं। दीर्घकालिक तनाव ऐसा हारमोन रिलीज़ करता है जो हिप्पोकैम्पस (मस्तिष्क का एक हिस्सा जो लघु-कालिक स्मृति को नियंत्रित करता है) को संकुचित कर देता है और इस वजह से स्मरण शक्ति पर बुरा असर पड़ता है। विस्मृति के असली जड़ यानी तनाव को ख़त्म करके आप स्मरणशक्ति को सुधार सकते हैं। (पढ़ें: वज़न घटाने के लिए 12 योगासन) ।6. माहवारी की समस्याएँ: महिलाओं में पीयूष ग्रंथि (जो अंडाशय, थायराइड और गुर्दे संबंधी ग्रंथि को नियंत्रित करता है) के हारमोन संबंधी नियंत्रणों को दबाने में तनाव अहम भूमिका निभाता है। इससे नियमित माहवारी चक्र, ओव्यूलेशन और दूसरे प्रजनन संबंधी प्रक्रियाओं पर असर पड़ता है। (पढ़ें: तुलसी दिलाएगी साइनसाइटिस से छुटकारा ।)7. पलकों का फड़कना: पलकों के फड़कने का तनाव से बहुत नज़दीकी सम्बन्ध है, हालांकि यह सम्बन्ध किस तरह का हैं, इस पर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचा नहीं जा सका है। अगली बार जब आपकी आँख फड़के तो आँखें बंद कर लें, सारे विचार दिमाग से निकाल दें, गहरी सांस लें और खुद को रिलैक्स करें। 8. मुंहासा: दीर्घकालिक तनाव लगभग पूरे शरीर पर ही प्रभाव डालते हैं। आपकी त्वचा भी कोइ अपवाद नहीं है। एंड्रोजन की अधिक मात्रा त्वचा में दरारों का कारण बन सकती है। साथ ही जब आप तनावग्रस्त होते हैं, तो शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। (पढ़ें:त्रिफला के प्रभावी गुण। )9. निद्रा विकार: तनाव के दौरान आपका मस्तिष्क अनगिनत विचारों से भरा होता है। मस्तिष्क सोचने की प्रक्रिया को सामान्य से बहुत तेज़ कर देता है जो निद्रा पर बुरे प्रभाव डालता है। (पढ़ें: मधुमेह पर लगाम कसने के दस बेहतरीन योगासन।)10. बुरी सेक्स लाइफ़: निजी और कार्यों से जुड़े तनाव अच्छे सेक्स लाइफ की राह के सबसे बड़े रोड़े हैं। तनाव संबंधी हारमोन इंसानों में सेक्स की इच्छा जगाने वाले हारमोन (लिबिडो) में हस्तक्षेप करते हैं।