
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : February 4, 2022 6:01 AM IST
एक नयी स्टडी के आधार पर वैज्ञानिकों ने यह कहा है कि, कोरोना वायरस के सम्पर्क में आने के बाद 42 घंटों के अंदर कोविड-19 संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। वहीं, इससे पहले जो भी आकलन किए गए थे उसकी तुलना में संक्रमण के लक्षण दिखने की गति काफी अधिक बतायी गयी है। बता दें कि इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार, संक्रमण के बाद कोविड के लक्षण दिखने में तकरीबन 5-6 से दिनों का समय लग सकता है। लेकिन इंपीरियल कॉलेज लंदन के रिसर्चर द्वारा की गयी स्टडी के अनुसार, वायरस के संपर्क में आने के बाद लगभग दो दिनों बाद संक्रमण के लक्षण तेजी से विकसित होने लगते हैं। (Symptoms Of Covid-19 Infection )
इस स्टडी के परिणाम प्री-प्रिंट सर्वर में प्रकाशित किए गए हैं। इस स्टडी के अनुसार संक्रमण के लक्षण सबसे पहले गले में दिखायी देते हैं,जबकि इस वायरस से होने वाला संक्रमण के लगभग पांच दिनों बाद पीक पर या हाई पॉइंट पर पहुंचता है। इस लेवल पर पहुंचने पर वायरस गले की तुलना में नाक में काफी अधिक मात्रा में होता है। निष्कर्षों से यह भी पता चला है कि वायरस पहले गले में पाया गया, नाक की तुलना में काफी पहले (नाक में 58 घंटे की तुलना में गले में 40 घंटे) वायरस की पुष्टि हुई। हालांकि अभी तक इस शोध की पूर्ण समीक्षा की जानी बाकी है।
स्टडी के मुताबिक, वायरस का स्तर पहले कम दिखाई दिया और गले में जाने पर यह जल्द ही चरम पर दिखाई दिया। गले की तुलना में नाक में वायरस का चरम स्तर काफी अधिक पाया गया। यह मुंह की अपेक्षा नाक से वायरस के संभावित रूप से अधिक जोखिम का संकेत देता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह मुंह और नाक दोनों को ढंकने के लिए उचित फेस मास्क के महत्व पर प्रकाश डालता है।
टीम ने यह भी पाया कि पाश्र्व प्रवाह परीक्षण (एलएफटी) एक आश्वस्त रूप से विश्वसनीय संकेतक हैं कि क्या संक्रामक वायरस मौजूद है (अर्थात, क्या वे अन्य लोगों को वायरस संचारित करने में सक्षम होने की संभावना है)। हालांकि, संक्रमण की शुरुआत और अंत में वायरस के निचले स्तर को लेने में एलएफटी परीक्षण कम प्रभावी थे।
स्टडी के परिणामों के बारे में बात करते हुए, इंपीरियल कॉलेज में संक्रामक रोग विभाग और संक्रमण संस्थान में विशेषज्ञ क्रिस्टोफर चिउ ने कहा, "हमारे अध्ययन से कुछ बहुत ही दिलचस्प नैदानिक अंतर्दृष्टि का पता चला है।" परीक्षण में, 18-30 वर्ष की आयु के 36 स्वस्थ पुरुष और महिला स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। विश्व के विभिन्न स्थानों पर हुए तमाम अध्ययनों से वायरस से बचने और गंभीर परिणामों से बचने के लिए मास्क पहननेऔर सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने के साथ ही वैक्सीन की उपयोगिता साबित हुई है।
(आईएएनएस)