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Written By: Anshumala | Published : January 18, 2019 3:26 PM IST
अभिनेता स्वप्निल जोशी को महाराष्ट्र में लिम्फैटिक फाइलेरियासिस जैसी बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए 'ब्रांड एम्बेसडर' बनाया गया है। © swwapnil_joshi/instagram
अभिनेता स्वप्निल जोशी को महाराष्ट्र में लिम्फैटिक फाइलेरियासिस जैसी बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए 'ब्रांड एम्बेसडर' बनाया गया है। यहां जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने जोशी को ''लिम्फैटिक फाइलेरियासिस'' (एलएफ) उन्मूलन के लिए बुधवार को ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया। स्वप्निल लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (जिसे आमतौर पर हाथी पांव कहा जाता है) पर जागरूकता उत्पन्न करने और इस रोग को महाराष्ट्र से दूर करने के सरकारी प्रयासों में सहयोग देंगे।
चूंकि भारत लिम्फैटिक फाइलेरियासिस से वर्ष 2020 तक मुक्त होने के प्रयास में है, इसलिए पूरे विश्व का ध्यान भारत की ओर है और इस प्रतिबद्धता ने स्वप्निल को प्रभावी व्यक्तित्व बना दिया है।
बयान के अनुसार, फाइलेरियासिस से मुक्ति विश्व स्वास्थ्य संगठन का दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए सर्वाधिक वरीयता प्राप्त प्राथमिकताओं में से एक है। पूरी दुनिया के देशों ने वर्ष 2020 तक इस बीमारी से मुक्त होने का संकल्प लिया है। भारत में नेशनल वेक्टर बोर्न डिसीज कंट्रोल प्रोग्राम के कार्यालय ने नए उपचार (ट्रिपल ड्रग थेरेपी) द्वारा एक दशक पुराने रोग मुक्ति कार्यक्रम पर फिर से जोर दिया है।
स्वप्निल जोशी ने कहा, "इस अभिशाप से मुक्त होने का समय आ गया है। इसमें योगदान देने का मौका पाकर मैं सम्मानित हूं। हाथी रोग की रोकथाम की जा सकती है लेकिन ऐसा कम ही लोग जानते हैं। मैं लोगों को सरकारी दवाएं लेने के लिए प्रोत्साहित करूंगा। यह हमारी जिम्मेदारी है कि लोग महाराष्ट्र और भारत को फाइलेरियासिस से मुक्त बनाएं।"
Our country is gearing up to eliminate #LymphaticFilariasis with the introduction of the new Triple Drug Therapy from Nagpur from 20th January 2019. I'm doing my bit to make India Filariasis free. Promise me that you will too #IndiaWillEndLFhttp://hindustantimes.newspaperdirect.com/epaper/iphone/homepage.aspx?noredirect=true#_articled675cafc-c672-45c1-be01-e4dae521962c/waarticled675cafc-c672-45c1-be01-e4dae521962c/d675cafc-c672-45c1-be01-e4dae521962c//true
— "सचिन" स्वप्निल जोशी (@swwapniljoshi) January 16, 2019
महाराष्ट्र सरकार, नेशनल प्रोग्राम फॉर एलिमिनेशन ऑफ लिम्फैटिक फाइलेरियासिस के अंतर्गत 20 जनवरी से नागपुर में मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) शुरू करने वाली है।
क्या होती है फाइलेरियासिस
फाइलेरिया या फाइलेरियासिस परजीवी के कारण होने वाला रोग है। ये परजीवी धागे के समान दिखता है जिसे 'फाइलेरिओडी' (Filarioidea) कहते हैं। यह एक तरह का संक्रामक उष्णकटिबन्धीय रोग है मतलब ये गर्म प्रदेशों में अधिक होता है। इसलिए यह बीमारी पूर्वी भारत, मालाबार और महाराष्ट्र के पूर्वी इलाकों में बहुत अधिक फैली हुई है।
क्यूलैक्स मच्छर इसका कारक
सामान्य तौर पर क्यूलैक्स मच्छर को इस बीमारी का कारक माना जाता है। यह कृमिवाली बीमारी है जिसमें कृमि शरीर के लसिका तंत्र की नलियों में होते हैं और इन नलियों को बंद कर देते हैं। इसके संक्रमण से लसीका अपना कार्य करना बंद कर देते हैं। ये कृमि बहुत छोटे आकार के होते हैं जो क्यूलैक्स मच्छर के काटने से शरीर में प्रवेश करते हैं। यह वयस्क कृमि में लाखों की संख्या में छोटी-छोटी कृमि पैदा करने की क्षमता होती है। बीमार इंसान से मच्छर खून चूसकर इस कृमि को दूसरे स्वस्थ मनुष्य तक पहुंचाते हैं।
इसके लक्षण
फाइलेरिया रोग में इंसान के शरीर का कोई भाग बहुत अधिक फूलने लगता है। अक्सर ये हाथ या पैरो में ही होता है, लेकिन कई बार ये स्तनों और गुदा के हिस्से में भी होता है। इसके लक्षण निम्न हैं-
- शरीर के संक्रमित होने के कुछ सालों बाद इसके लक्षण दिखते हैं।
- इसमें गुप्तांग एवं जांघों के बीच गिल्टी हो जाती है जो बहुत अधक फूल जाती है और इसमें काफी दर्द रहता है।
- एक या दोनों हाथ व पैरों में बहुत अधिक सूजन होना लेकिन ये अधिकतर पैरों में ही होता है जिस कारण इसे हाथी पांव कहते हैं।
- गले में बहुत अधिक सूजन आ जाती है।
- स्तनों में सूजन होना।
- पैरों व हाथों की लसिका वाहिकाएं लाल हो जाती हैं जिससे पैरों में लाल धारियां पड़ जाती हैं।
- इस बीमारी में पुरुषों के अंडकोष संक्रमित होकर फूल जाते हैं।
- शरीर में कंपकंपी आना और बुखार होना।
हाथी पांव का इलाज
इस बीमारी का इलाज इसके प्रारंभिक चरण में ही शुरू कर देना चाहिए।
फाइलेरिया फैले हुए क्षेत्र में जाने से बचें। अगर उस क्षेत्र में आप रहते हैं तो मच्छरों से दूर रहने के पूरे उपाय करें और शरीर को ढकने वाले पूरे कपड़े पहनें।
अपने क्षेत्र में मच्छरों को मारने के लिए छिड़काव करें।
क्यूलैक्स मच्छर सुबह और शाम को काटता है, इसलिए सुबह और शाम को विशेष तौर पर मच्छरों से बचकर रहें।
इनपुट: (आइएएनएस हिंदी)
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