तालाब और नदी के पानी में लम्बे समय तक जिंदा रह सकता है कोरोना वायरस, एक्सपर्ट्स ने किया दावा

वैज्ञानिकों ने एक नयी जानकारी का खुलासा किया है। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस पानी (Coronavirus in Water) में भी लम्बे समय तक ज़िंदा रह सकता है। इसीलिए, जो लोग नदियों, तालाब या झील आदि में तैरने जाते हैं उन्हें सावधान रहना चाहिए। (Survival of Coronavirus in Water)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 30, 2020 10:12 AM IST

Survival of Coronavirus in Water:   कोरोना वायरस महामारी की नयी लहर ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है। तो साथ ही, वैक्सीन का काम लगभग पूरा होता हुआ दिखायी दे रहा है। लेकिन, जब तक वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) उपलब्ध नहीं हो रही, तब तक लोगों को सावधानी बरतनें के लिए कहा जा रहा है। इसी बीच वैज्ञानिकों ने एक नयी जानकारी का खुलासा किया है। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस पानी (Coronavirus in Water) में भी लम्बे समय तक ज़िंदा रह सकता है। इसीलिए, जो लोग नदियों, तालाब या झील आदि में तैरने जाते हैं उन्हें सावधान रहना चाहिए। (Survival of Coronavirus in Water)

क्या  तालाब और नदी के पानी में लम्बे समय तक जिंदा रह सकता है कोरोना वायरस?

गौरतलब है कि, दुनियाभर में इस बात पर रिसर्च किया जा रहा है कि कोरोना वायरस जलस्रोतों में कितनी देर तक ज़िंदा रह सकता है। कई रिसर्च और स्टडीज़ में यह पाया गया है कि कोरोना वायरस प्रदूषित, रुके हुए या साफ पानी में भी लम्बे संमय तक ज़िंदा रह सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, ना केवल कोरोना वायरस ज़िंदा रहता है बल्कि यह कई किमी तक आगे भी यात्रा कर सकता है। ( Chances of Survival of Coronavirus in Water )

एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर कोई कोविड-19 संक्रमित किसी तालाब या नदी (River Water) में नहाने जाता है तो कोरोना वायरस पानी में घुल सकते हैं। ऐसे में, इस पानी में नहाने वाले अन्य लोगो को भी कोविड-19 इंफेक्शन होने का खतरा उत्पन्न होता है। (Risk of Covid-19 infection by bathing in River Water)

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना, अमेरिका (University of Arizona) के शोधकर्ताओं द्वारा की एक स्टडी में यह कहा गया कि कोरोना वायरस अनुकूल परिस्थितियों में पानी में बहुत लंबे समय तक सक्रिय रहता है। हालांकि, पानी में कोरोना वायरस विकसित नहीं होता और इसकी संख्या भी नहीं बढ़ती लेकिन, यह ज़िंदा रहता है। पर मानव शरीर के सम्पर्क में आते ही यह अपना असर दिखाना शुरु कर देता है।

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