शादियों में खाप पंचायतों का दखल गैरकानूनी : सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा, कोई भी पंचायत या जनसभा दो बालिगों की मर्जी से की गई शादी में हस्तक्षेप सकती है तो इसे गैरकानूनी माना जाए।

WrittenBy

Written By: Editorial Team | Published : March 27, 2018 12:31 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि शादी के लिए सहमत दो वयस्कों के बीच विवाह के मामले में खाप पंचायतों का किसी भी तरह का दखल अवैध है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम.खानविल्कर व न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ की पीठ ने सुधारात्मक व सुरक्षात्मक कदम निर्धारित किए, जो इस तरह के मामलों से निपटने के लिए कानूनी रूप रेखा के आने तक काम करेंगे।

कोर्ट ने कहा, कोई भी पंचायत या जनसभा दो बालिगों की मर्जी से की गई शादी में हस्तक्षेप सकती है तो इसे गैरकानूनी माना जाए।

गौरतलब है कि देश के ग्रामीण इलाकों में खाप पंचायतें सक्रिया हैं। एक गोत्र या जाति के लोग मिलकर एक खाप-पंचायत बनाते हैं, जो पांच या उससे ज्यादा गांवों की होती है। इन्हें कानूनी मान्यता नहीं है। इसके बावजूद गांव में किसी तरह की घटना के बाद खाप कानून से ऊपर उठ कर फैसला करती हैं।  खाप पंचायतें देश के कुछ राज्यों के गांवों में काफी लंबे वक्त से काम करती रही हैं। हालांकि, इनमें हरियाणा की खाप पंचायतें कुछ अलग पहचान रखती हैं। कहा जाता है कि खाप की शुरुआत की हरियाणा से ही हुई थी।

यह ऐतिहासिक फैसला एक एनजीओ शक्ति वाहिनी की याचिका पर आया है। शक्ति वाहिनी ने शीर्ष अदालत से खाप पंचायतों जैसी संस्थाओं की रजामंदी के बिना होने वाले विवाहों में उनके दखल और शादी के खिलाफ हुक्म जारी किए जाने को लेकर अपील की थी।

स्रोत :IANS Hindi.

चित्रस्रोत: Shutterstock.

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source