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Written By: Yogita Yadav | Published : November 28, 2018 6:19 PM IST
इस बार सुपर सिख रन में साहस के नाम से एक नया वर्ग शामिल किया गया है जिसमें दिव्यांग वर्ग (व्हीलचेयर, कृत्रिम पैर, ब्लेड और दृष्टिबाधित) के लोग हिस्सा लेंगे और उन्हें बकायदा पुरस्कृत भी किया जाएगा। © Shutterstock
जीवन के असली नायकों को सामने लाने के उद्देश्य के साथ सुपर सिख रन के तीसरे संस्करण का आयोजन आगामी 9 दिसंबर को राजधानी में किया जाएगा जिसमें 6000 से ज्यादा धावक तीन वर्गों हाफ मैराथन, 10 किमी और 5 किमी रेस में हिस्सा लेंगे।
भारत के पहले ब्लेड रनर और इस इवेंट के मेंटर मेजर डीपी सिंह ने बुधवार को बताया कि इसके पहले दो संस्करण का आयोजन 2016 और 2017 में किया गया था और तीसरे संस्करण में अब तक उम्मीदों से ज्यादा पंजीकरण देखने को मिला है। यह भी पढ़ेें - भारतीय महिलाओं की हड्डियों को खोखला बना रही है यह खामोश बीमारी
साहस का देंगे परिचय
इस बार सुपर सिख रन में साहस के नाम से एक नया वर्ग शामिल किया गया है जिसमें दिव्यांग वर्ग (व्हीलचेयर, कृत्रिम पैर, ब्लेड और दृष्टिबाधित) के लोग हिस्सा लेंगे और उन्हें बकायदा पुरस्कृत भी किया जाएगा। साहस वर्ग में इस बार 40 से ज्यादा प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है और इनमें से 30 व्हीलचेयर धावकों को राजीव विराट प्रशिक्षण दे रहे हैं जिन्होंने खुद व्हीलचेयर टेनिस में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। यह भी पढ़ें – विश्व एड्स दिवस 2018 : तीस वर्ष बाद भी टेस्ट करवाने में शर्म महसूस करते हैं लोग
सुपर सिख रन की शुरूआत ऐतिहासिक गुरूद्वारा रकाबगंज से होगी और यह गोल डाक खाना, कालीबाड़ी, पेशवा रोड, मंदिर मार्ग और शंकर रोड से गुजरते हुये वापिस रकाबगंज पर समाप्त होगी। इस रेस का उद्देश्य ऐसे नायकों को सामने लाना है जिन्होंने शारीरिक कमियों के बावजूद समाज के सामने साहस के साथ जीवन जीने का उदाहरण पेश किया है। यह भी पढ़ें – एचआईवी का वाहक हो सकता है वन नाइट स्टैंड
बेमिसाल है इनकी हिम्मत
सुपर सिख रन के तीसरे संस्करण का प्रायोजन हीरो इलेक्ट्रिक कर रहा है। इस अवसर पर हीरो इलेक्ट्रिक के प्रबंध निदेशक नवीन मुंजाल, 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में हॉकी स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य प्रीतम रानी सिवाच, दोनों हाथ कटे होने के बावजूद पैरों से साइकिल चलाने वाले जगविंदर सिंह मौजूद थे। जगविंदर ने इस मौके पर कहा,“ ऐसे इवेंट से दिव्यांग लोगों के प्रति लोगों की सोच बदलेगी और वे उन्हें बेचारा समझना बंद करेंगे।”
जगविंदर ने कहा,“ मैं पैरों से ही ड्राइंग भी करता हूं, खाना भी बनाता हूं और 300 किमी तक की रेस भी कर चुका हूं। मेरा मानना है कि आप हमें इस नज़र से देखें कि हम कुछ कर सकने में सक्षम है। हमें किसी की सहानुभूति की जरूरत नहीं है।”