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Side effects of sunscreen: खून में घुलने लगते हैं सनस्क्रीन में मौजूद ये केमिकल, जानें किन बातों का रखें ध्यान

अमेरिका खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा किए गए एक रिसर्च में पाया गया कि ज्यादा मात्रा में या बार-बार सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने से कई केमिकल खून में घुल जाते हैं, डॉक्टर किरण ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए इस बारे में लोगों को जानकारी दी।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : August 12, 2022 6:47 PM IST

Skin care tips in hindi: स्किन को धूप व धूल-मिट्टी से बचाकर रखना इतना आसान नहीं है। धूप में 10 मिनट बाहर निकलना आपकी स्किन टोन को 1 हफ्ता पीछे लेकर जा सकता है। इसलिए डॉक्टर व सभी स्किन स्पेशलिस्ट आपको हमेशा सनस्क्रीन लगाकर ही घर से बाहर निकलने की सलाह देते हैं। सनस्क्रीन को ऐसे खास तरीके से बनाया जाता है, जिससे धूप से निकलने वाली पराबैंगनी किरणें और धूल-मिट्टी के कण आदि त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे किए गए और इसके बारे में डॉक्टर किरण ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए लोगों को बताया।

कई केमिकल मिल जाते हैं खून में

डॉक्टर किरण के इंस्टाग्राम हैंडल drkiransays पर की गई एक पोस्ट के अनुसार यूएस फूड एंड ड्रग एसोसिएशन ने एक अध्ययन में पाया कि सनस्क्रीन में एवोबेनज़ोन, ऑक्सीबेनज़ोन, ऑक्टोक्रिलीन, होमोसैलेट, ऑक्टाइल सैलिसिलेट और ऑक्टिनोक्सेट जैसे केमिकल पाए जाते हैं, जो स्किन में अवशोषित होकर खून तक चले जाते हैं। सनस्क्रीन के ये केमिकल खून में जाकर हेल्थ को कई गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

ज्यादा या बार-बार लगाने से नुकसान

अमेरिका के फूड एंड ड्रग्स एसोसिएशन द्वारा किए गए रिसर्च में पाया गया कि जो लोग बार-बार या ज्यादा मात्रा में अपनी स्किन पर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं, तो उसमें मौजूद केमिकल त्वचा में अवशोषित होकर खून में घुल जाते हैं। खून हमारे शरीर में लगातार बहता रहता है, जिसे ब्लडस्ट्रीम कहा जाता है। ये केमिकल ब्लडस्ट्रीम तक पहुंच जाते हैं, जिससे खून के माध्यम से ही ये पूरे शरीर तक फैल सकते हैं।

कौन से क्रीम है हानिकारक

अब सवाल ये उठता है कि क्या सभी सनस्क्रीन में ये केमिकल होते हैं और क्या सभी सनस्क्रीन को लगाना सुरक्षित नहीं है। इस बारे में डॉक्टर किरण ने अपने पोस्ट में बताया कि मिनरल सनब्लॉक जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड अवशोषित नहीं होते हैं और इसलिए इनका इस्तेमाल करना सही व सुरक्षित हो सकता है। हालांकि, अभी उन्होंने यह भी बताया कि अभी एफडीए ने भी यह साफ नहीं किया है कि कि ऊपर बताए गए केमिकल स्किन में अवशोषित होते हैं, वह सिर्फ अध्ययन से मिले आंकड़े बताए गए हैं।

मिनरल सनस्क्रीन है सबसे बेहतर

आगे डॉक्टर ने अपने पोस्ट में यह लिखा कि जितना हो सके मिनरल बेस्ड सनस्क्रीन का ही इस्तेमाल करें। अगर आपको स्किन के ऊपर बनने वाली सफेद परत अच्छी नहीं लगती है, जो आप ऐसे सनस्क्रीन का चुनाव कर सकते हैं, जिसमें वे केमिकल न हों जिनमें एफडीए द्वारा बताए गए त्वचा में अवशोषित होने वाले हो जाने वाले तत्व न हों।

घरेलू सनस्क्रीन भी है ऑप्शन

हमारे किचन में भी ऐसी कई चीजें हैं, जिनकी मदद से घर पर ही सनस्क्रीन बनाया जा सकता है। घर पर बनी सनस्क्रीन का सबसे बड़ा फायदा ये है कि उनमें किसी प्रकार का केमिकल नहीं होता है और आप उसे जितना बार चाहें इस्तेमाल कर सकते हैं उससे स्किन या हेल्थ को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है। घरेलू सनस्क्रीन बनाने का तरीका भी काफी आसान होता है।